तालझारी में ‘शिक्षा का अधिकार अधिनियम’ पर राष्ट्रीय सेमिनार संपन्न, विशेषज्ञों ने जमीनी क्रियान्वयन पर दिया जोर

Lok Bimb
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फातेह आलम तालझारी

तालझारी : तालझारी में रविवार, 29 मार्च 2026 को “शिक्षा का अधिकार अधिनियम क्रियान्वयन में समस्याएँ और चिंताएँ” विषय पर एक दिवसीय महत्वपूर्ण शैक्षणिक एवं बौद्धिक सेमिनार का सफल आयोजन किया गया। नई दिल्ली की प्रतिष्ठित संस्था अजीजिया रहमानी एजुकेशनल एंड वेलफेयर फाउंडेशन द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में देश के जाने-माने शिक्षाविदों, राजनेताओं और शोधार्थियों ने हिस्सा लिया। सेमीनार के संयोजक और मारवाड़ी कॉलेज, भागलपुर के सहायक प्राध्यापक जनाब मोहम्मद शहाबुद्दीन रहमानी कासमी ने अतिथियों का स्वागत शॉल और पुष्पगुच्छ भेंट कर किया। कार्यक्रम का आगाज उद्घाटन सत्र से हुआ, जिसके बाद तीन अलग-अलग तकनीकी सत्रों में विषय पर गंभीर मंथन किया गया। संवैधानिक पहलुओं और जमीनी हकीकत पर चर्चा
उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता पटना के प्रसिद्ध शिक्षाविद प्रोफेसर सफदर इमाम कादरी ने की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा
शिक्षा के अधिकार कानून की सार्थकता तभी है जब इसका लाभ पिछड़े और गरीब क्षेत्रों के अंतिम बच्चे तक पहुँचे। इसे केवल कागजों तक सीमित न रखकर जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाना अनिवार्य है। मुख्य वक्ता के रूप में टी.एन.बी. कॉलेज, भागलपुर के डॉ. मोहम्मद मुशफिक आलम ने अनुच्छेद 21ए और 51ए के हवाले से शिक्षा के अधिकार की संवैधानिक व्याख्या की। उन्होंने विशेष रूप से लड़कियों के लिए सुरक्षित शैक्षणिक माहौल और कानून में विशेष प्रावधानों की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में राजमहल विधायक मोहम्मद ताजुद्दीन राजा, बी.डी.ओ. मोहम्मद यूसुफ अंसारी और जिला परिषद सदस्य रंधीर सिंह उपस्थित रहे। इस अवसर पर अमीर-ए-शरीअत (बिहार, ओडिशा एवं झारखंड) मौलाना अहमद वली फैसल रहमानी और एन.सी.एम.ई.आई. के अध्यक्ष प्रोफेसर शाहिद अख्तर के शुभकामना संदेश भी पढ़कर सुनाए गए। तकनीकी सत्र और शोध पत्र प्रस्तुति दूसरे और तीसरे सत्र की संयुक्त अध्यक्षता प्रोफेसर शाहिद रजा जमाल (शाहिद रजमी) और डॉ. मुशफिक आलम ने की। नई शिक्षा नीति (NEP 2020): डॉ. संजय कुमार जायसवाल ने RTE को नई शिक्षा नीति के साथ जोड़ने का सुझाव दिया। प्रबंधन और क्रियान्वयन डॉ. पंकज कुमार ने प्रबंधन के दृष्टिकोण से कानून की खामियों पर प्रकाश डाला। युवा दृष्टिकोण जयप्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा के शोधार्थी मोहम्मद मरजान अली ने अत्यंत प्रभावशाली शोधपत्र प्रस्तुत किया, जिसकी श्रोताओं ने मुक्त कंठ से सराहना की। इसके अलावा मौलाना सलाहुद्दीन कासमी और मास्टर नजमुद्दीन रहमानी ने भी अपने शोध पत्र साझा किए। अंतिम सत्र में प्रोफेसर सफदर इमाम कादरी ने पूरे सेमिनार का निष्कर्ष प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के अंत में फाउंडेशन की अध्यक्ष सबा अंजुम ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। प्रतिभागियों को स्मृति-चिह्न और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।
इस गरिमामय अवसर पर मोहम्मद सलाहुद्दीन, मोहम्मद शहजाद, मोहम्मद नसीर, मोहम्मद ताहिर, मोहम्मद जहीर सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक और शिक्षा प्रेमी उपस्थित थे। यह सेमिनार न केवल जिले बल्कि राज्य के शैक्षणिक विमर्श में एक मील का पत्थर साबित हुआ।

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