जिला विधिक सेवा प्राधिकार में एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित, पारा विधिक स्वयंसेवकों को दी गई साइबर ठगी से बचाव की जानकारी
फातेह आलम तालझारी
साहिबगंज :- झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, रांची के निर्देशानुसार तथा प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अध्यक्ष सुभाष के मार्गदर्शन में गुरुवार को लोक अदालत कक्ष में साइबर सुरक्षा विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें पारा विधिक स्वयंसेवकों (न्याय मित्रों) को बढ़ते साइबर अपराध, ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी और डिजिटल अरेस्ट जैसी घटनाओं से बचाव के उपायों की जानकारी दी गई। कार्यशाला के दौरान साइबर अपराधियों द्वारा अपनाए जा रहे ठगी के विभिन्न तरीकों पर विस्तार से चर्चा की गई। स्वयंसेवकों को बताया गया कि साइबर अपराधी पुलिस, सीबीआई, ईडी अथवा अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बनकर लोगों को फोन करते हैं। इसके बाद फर्जी मामले में गिरफ्तारी का डर दिखाकर पैसे की मांग करते हैं। ऐसी स्थिति में घबराने के बजाय सतर्क रहना चाहिए और किसी भी अनजान व्यक्ति के खाते में पैसे हस्तांतरित नहीं करने चाहिए।
ओटीपी और बैंक संबंधी जानकारी साझा करने से बचें
कार्यशाला में लोगों को जागरूक करने के लिए ओटीपी, एटीएम पिन, बैंक खाते से जुड़ी जानकारी और पासवर्ड किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा नहीं करने की सलाह दी गई। साथ ही संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने, अनजान स्रोतों से मोबाइल एप डाउनलोड करने और सोशल मीडिया पर निजी जानकारी साझा करने से बचने के महत्व पर जोर दिया गया।
पारा विधिक स्वयंसेवकों को निर्देश दिया गया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में विद्यालयों, पंचायतों, अस्पतालों और ग्रामीण इलाकों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करें। इन कार्यक्रमों के माध्यम से आम नागरिकों, विद्यार्थियों और वरिष्ठ नागरिकों को साइबर अपराध के तरीकों तथा उनसे बचाव के उपायों की जानकारी दें, ताकि लोग ऑनलाइन ठगी के प्रति सतर्क रह सकें।
ठगी होने पर तत्काल 1930 पर करें शिकायत
कार्यशाला में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी का शिकार होने पर बिना देर किए राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करने की जानकारी आमजन तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया गया। इसके अलावा साइबर अपराध से संबंधित शिकायत आधिकारिक साइबर अपराध पोर्टल पर दर्ज कराने के प्रति भी लोगों को जागरूक करने का निर्देश दिया गया।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य पारा विधिक स्वयंसेवकों के माध्यम से जिले के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना और लोगों को ऑनलाइन ठगी, फर्जी पुलिस कॉल तथा डिजिटल अरेस्ट जैसी घटनाओं से बचाव के लिए सजग बनाना है।


