के. ए. पॉल की इजरायलियों से अपील, शांति और राजनीतिक बदलाव के लिए एकजुट होने का आह्वान

Lok Bimb
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# ईरान युद्ध को लेकर नेतन्याहू की नीतियों पर उठाए सवाल, 15 सूत्रीय शांति प्रस्ताव पर विचार करने और बातचीत के जरिए संघर्ष समाप्त करने की मांग

नई दिल्ली : 
ग्लोबल पीस इनिशिएटिव के संस्थापक और अंतरराष्ट्रीय शांति समर्थक डॉ. के. ए. पॉल ने इजरायल के लोगों से 27 अक्टूबर को शांति और राजनीतिक जवाबदेही के लिए एकजुट होने की अपील की। उन्होंने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की ईरान संबंधी नीतियों पर सवाल उठाते हुए लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जरिए राजनीतिक बदलाव का आह्वान किया। डॉ. पॉल ने कहा कि ईरान युद्ध का असर मध्य पूर्व से बाहर भी पड़ रहा है और इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था, ईंधन व खाद्य पदार्थों की कीमतों तथा कमजोर समुदायों पर दबाव बढ़ सकता है। उन्होंने सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीति को प्राथमिकता देने और संघर्ष में शामिल सभी पक्षों से बातचीत शुरू करने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि सैन्य हमलों के जरिए सत्ता परिवर्तन की कोशिश क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ा सकती है। डॉ. पॉल ने अमेरिका, इजरायल, ईरान और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से युद्ध समाप्त करने, आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा सभी पक्षों की सुरक्षा संबंधी चिंताओं का समाधान निकालने के लिए मिलकर काम करने की अपील की। डॉ. पॉल ने बताया कि उन्होंने 15 मार्च को ईरान युद्ध समाप्त करने के लिए 15 सूत्रीय शांति प्रस्ताव प्रस्तुत किया था। उन्होंने संबंधित पक्षों से इस प्रस्ताव की समीक्षा करने और युद्ध रोकने में मददगार अन्य कूटनीतिक पहलों पर भी गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया। उन्होंने अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के स्पीकर माइक जॉनसन के शांति प्रयासों की भी सराहना की। इजरायल के लोगों को संबोधित करते हुए डॉ. पॉल ने कहा कि अपने देश से प्रेम करने का अर्थ उसके नेताओं के हर फैसले का समर्थन करना नहीं है। उन्होंने नागरिकों से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाने तथा ऐसी नीतियों की जवाबदेही मांगने का आग्रह किया, जिनसे क्षेत्रीय संघर्ष बढ़ने का खतरा हो सकता है। डॉ. पॉल ने मीडिया प्रतिनिधियों और विश्व नेताओं को रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को शाम 6 से 9 बजे तक डलास में आयोजित ग्लोबल पीस एंड प्रेयर मीटिंग में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि स्थायी शांति के लिए संवाद, कूटनीति और मानव जीवन की रक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है।

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