– अगले दो माहीने में तैयार होगा पुनर्वास कार्यक्रम, असम और पश्चिम बंगाल से गैंडा लाने की योजना
गोपाल विद्यार्थी
पटना : बिहार में गैंडा संरक्षण को प्राकृतिक अधिवास तक विस्तार देने की तैयारी तेज हो गई है। वाल्मीकि व्याघ्र आरक्ष (वीटीआर) में गैंडा संरक्षण की संभावनाओं के आकलन के बाद अब यहां गैंडा पुनर्वास एवं संरक्षण कार्यक्रम शुरू करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। अगले एक से दो माह में इसके लिए विस्तृत री-इंट्रोडक्शन कार्यक्रम तैयार की जाएगी। इसके बाद असम और पश्चिम बंगाल से गैंडा लाकर वीटीआर में संरक्षित करने का प्रयास किया जाएगा। वहीं, राजगीर जू सफारी में भी गैंडा लाने और उसके संरक्षण की योजना तैयार की गई है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. रामचन्द्र प्रसाद ने पटना जू में आयोजित विश्व गैंडा दिवस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह जानकारी दी।
मौके पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन बल प्रमुख) अरविंद सिंह ने कहा कि नेपाल के चितवन नेशनल पार्क से पिछले तीन-चार वर्षों में दो गैंडे वाल्मीकि व्याघ्र आरक्ष में आकर रह रहे हैं। दोनों नर हैं। वीटीआर की भौगोलिक स्थिति, प्राकृतिक अधिवास और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए करीब दो वर्ष पहले गैंडा संरक्षण की संभावनाओं का आकलन कराया गया था। अध्ययन में यहां गैंडा संरक्षण की पर्याप्त संभावनाएं सामने आईं। इसी के आधार पर अब गैंडा पुनर्वास कार्यक्रम तैयार किया जा रहा है। गैंडा संरक्षण को चिड़ियाघर तक सीमित न रखते हुए प्राकृतिक अधिवास में भी मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। विभाग का लक्ष्य है कि अगले विश्व गैंडा दिवस से पहले राजगीर जू सफारी और वीटीआर में गैंडा संरक्षण की योजनाओं को धरातल पर उतारने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं।
पटना जू में 34 गैंडे, 25 का जन्म यहीं
पटना जू गैंडा संरक्षण और प्रजनन के क्षेत्र में देश में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। वर्ष 1979 में पहली बार असम से गैंडे का एक जोड़ा पटना जू लाया गया था। इसके बाद 1982 में बेतिया से एक गैंडे को रेस्क्यू कर यहां लाया गया। इस तरह पटना जू में गैंडों की संख्या तीन हुई। इसके बाद यहां सफल प्रजनन कार्यक्रम शुरू हुआ और गैंडों की संख्या लगातार बढ़ती गई। अब तक पटना जू में कुल 34 गैंडे रखे गए हैं, जिनमें 25 का जन्म पटना जू में ही हुआ है। गैंडा संरक्षण और प्रजनन के क्षेत्र में पटना जू की उपलब्धि को देश-विदेश में पहचान मिली है। यहां से रांची, दिल्ली, कानपुर, हैदराबाद, मैसूर और चेन्नई सहित कई चिड़ियाघरों को एनिमल एक्सचेंज कार्यक्रम के तहत गैंडे दिए गए हैं। अमेरिका के सैन डिएगो जू को भी पटना जू से गैंडा उपलब्ध कराया गया है।
2019 से संचालित हो रहा राइनो ब्रीडिंग सेंटर
अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक सह मुख्य वन्यप्राणी प्रतिपालक अभय कुमार ने कहा कि पटना जू में वर्ष 2019 में गैंडा संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र की स्थापना की गई। इसके बाद से यहां व्यवस्थित तरीके से राइनो ब्रीडिंग सेंटर का संचालन किया जा रहा है। पटना जू में गैंडा संरक्षण और प्रजनन का अर्जित अनुभव अब बिहार के अन्य वन क्षेत्रों में प्राकृतिक अधिवास आधारित संरक्षण को आगे बढ़ाने में उपयोगी साबित होगा।
मंत्री ने अपने हाथों से गैंडे को खिलाया चारा
कार्यक्रम के दौरान मंत्री डॉ. रामचन्द्र प्रसाद ने पटना जू में गैंडे के बाड़े में पहुंचकर अपने हाथों से उसे चारा खिलाया। उन्होंने गैंडे के संरक्षण, स्वास्थ्य और देखभाल की व्यवस्था की जानकारी भी ली। कार्यक्रम में गैंडा संरक्षण में योगदान देने वाले दैनिक कर्मियों और चिकित्सकीय पदाधिकारियों को सम्मानित किया गया। मंत्री ने संरक्षण कार्य में प्रत्यक्ष रूप से जुटे कर्मियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
दुनिया में पांच प्रजातियां, भारतीय गैंडा करीब चार हजार
विश्व गैंडा दिवस पर बताया गया कि दुनिया में गैंडों की पांच प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें भारतीय एक सींग वाला गैंडा पर्यटकों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र है। विश्व में गैंडों की कुल संख्या करीब 28 से 30 हजार के बीच बताई जाती है, जबकि भारतीय एक सींग वाले गैंडों की संख्या लगभग चार हजार है। गैंडे की सींग के लिए अवैध शिकार इसकी आबादी के लिए लंबे समय से बड़ा खतरा रहा है। संरक्षण और सुरक्षा उपायों के कारण गैंडों की संख्या में वृद्धि दर्ज की जा रही है।
पर्यटन और जैव विविधता संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा
बिहार में गैंडा संरक्षण के विस्तार से जैव विविधता संरक्षण के साथ-साथ वन्यजीव पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है। जिस प्रकार पर्यटक असम के काजीरंगा और पश्चिम बंगाल के वन क्षेत्रों में गैंडा देखने पहुंचते हैं, उसी तरह भविष्य में वीटीआर और राजगीर जू सफारी भी गैंडा दर्शन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित हो सकते हैं। इससे बिहार में वन्यजीव आधारित पर्यटन को नई पहचान मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर पर्यटन गतिविधियों और रोजगार के अवसरों का विस्तार होने की उम्मीद है।मौके पर विभाग के मुख्य वन संरक्षक (आईटी) एस. चंद्रशेखर, विशेष सचिव आलोक कुमार, मुख्य वन संरक्षक (प्रशासन एवं मानव संसाधन विकास) अमित कुमार, क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक पटना डॉ. नेसामणि, जू निदेशक हेमंत पाटिल, बिहार वेटनरी कॉलेज के डीन डॉ. पल्लव शेखर समेत विभागीय पदाधिकारी, पशु चिकित्सक, वनकर्मी, शिक्षक और विद्यार्थी मौजूद रहे।


