दशहरा महोत्सव के दूसरे दिन गांधी मैदान में बिखरे बिहार की लोक संस्कृति के रंग

Lok Bimb
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लोकगीत, शास्त्रीय नृत्य और पारंपरिक लोकनृत्यों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध

गोपाल विद्यार्थी

पटना : कला, संस्कृति एवं युवा विभाग तथा पटना प्रमंडल के संयुक्त तत्वावधान में गांधी मैदान में आयोजित दशहरा महोत्सव के दूसरे दिन बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं और लोक कलाओं की मनोहारी झलक देखने को मिली। लोकगीतों की मधुर स्वर लहरियों, भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुतियों और पारंपरिक लोकनृत्यों ने उत्सव के माहौल को और भी जीवंत बना दिया।कार्यक्रम की शुरुआत मगध संगीत संस्थान के कलाकारों द्वारा बिहार गौरव गाथा पर आधारित भावनृत्य से हुई। महका-महका सोंधी माटी का बिहार है… गीत के माध्यम से कलाकारों ने बिहार की लोक संस्कृति, ऐतिहासिक विरासत, त्योहारों और गौरवशाली परंपराओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। इस भावपूर्ण प्रस्तुति ने दर्शकों को बिहार की सांस्कृतिक जड़ों और अपनी माटी की सुगंध से जोड़ दिया। इसके बाद प्रसिद्ध लोक गायिका नीतू नवगीत ने अपनी सुमधुर प्रस्तुतियों से समां बांध दिया। उन्होंने मांगे ला हम वरदान हे गंगा मइया सहित छठ गीतों और मैथिली लोकगीत राम लगिहे पाहुनवां की प्रस्तुति देकर बिहार की लोक संगीत परंपरा की विविधता और मिठास को दर्शाया। उनकी प्रस्तुतियों ने दर्शकों को लोक संस्कृति के रंग में सराबोर कर दिया। प्रसिद्ध गायिका उषा सिंह ने सत्यम शिवम् सुंदरम और कोयल बिनु बगिया ना शोभे राजा जैसे गीतों की प्रस्तुति से कार्यक्रम में संगीत और सुरों की खूबसूरत छटा बिखेरी। उनकी गायकी ने दर्शकों को भावविभोर किया।वहीं, कला श्री समूह के कलाकारों ने दुर्गा वंदना पर आधारित मनोहारी शास्त्रीय नृत्य प्रस्तुत कर भक्ति, साधना और भारतीय शास्त्रीय कला का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया। इसके अतिरिक्त सामा-चकेवा पर्व पर आधारित संगीतमय नृत्य के माध्यम से मिथिला की लोक परंपराओं, पारिवारिक स्नेह और सांस्कृतिक विरासत को खूबसूरती से अभिव्यक्त किया गया। पारंपरिक लोकनृत्य झिझिया की प्रस्तुति ने भी दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया और बिहार की लोक कलाओं की जीवंतता को रेखांकित किया। सिने कलाकार चाहत सिँह ने भी भक्ति गीतों से भक्तिमय माहौल बना दिया।

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