बुजुर्गों के नेतृत्व में नौ दिनों तक गूंजते हैं भजन-कीर्तन, आपसी प्रेम और भाईचारे का देते हैं संदेश
गोपाल विद्यार्थी
बिक्रम : बिक्रम प्रखंड के बिसम्भरपुर गांव के ग्रामीण अपनी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने में जुटे हैं। यहां नवरात्र के अवसर पर पिछले करीब 60 वर्षों से गांव के देवी मंदिर में लगातार नौ दिनों तक श्रीरामचरितमानस का पाठ और भजन-कीर्तन किया जाता है। गांव के बड़े-बुजुर्गों के सहयोग से निभाई जा रही यह परंपरा आज भी ग्रामीण एकता और सांस्कृतिक चेतना की मिसाल बनी हुई है। गांव की रामायण मंडली के सदस्य नवरात्र के नौ दिनों तक हारमोनियम, ढोलक, झाल और मंजीरे की धुन पर श्रीरामचरितमानस का सस्वर गायन करते हैं। मंडली के संचालक वयोवृद्ध विजय सिंह उर्फ जी बालाजी ने बताया कि गांव में लगभग छह दशक से नवरात्र के दौरान भजन-कीर्तन और मानस पाठ की परंपरा चली आ रही है। करीब 30 वर्षों से वह स्वयं इस धार्मिक आयोजन का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नौ दिनों तक चलने वाला यह धार्मिक अनुष्ठान केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीणों के बीच आपसी प्रेम, सद्भाव और भाईचारे को भी मजबूत करता है। इसमें गांव के बुजुर्गों के साथ अन्य ग्रामीण भी उत्साहपूर्वक भाग लेते हैं। वहीं, बिंदु दुबे ने बताया कि नौ दिनों तक मानस पाठ और गायन के बाद नवमी के दिन वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हवन-पूजन किया जाता है। इसके उपरांत मानस पाठ का विधिवत समापन होता है। इस आयोजन में रामायण मंडली के सियाराम शर्मा, हरिद्वार शर्मा, वेंकटेश शर्मा, अमोद दुबे, सोनू दुबे, वीरेंद्र सिंह, अशोक सिंह, विनय सिंह, कपिलदेव सिंह, रामेश्वर सिंह, लालजी राम, विनोद राम सहित अन्य ग्रामीण सक्रिय भूमिका निभाते हैं। बिसम्भरपुर गांव की यह परंपरा नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, धार्मिक विरासत और सामूहिक सहभागिता से जोड़ने का भी काम कर रही है।
बिसम्भरपुर गांव में 60 वर्षों से नवरात्र पर हो रहा मानस पाठ, कायम है सांस्कृतिक परंपरा

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