जेपीएससी भर्ती घोटाला: सीआईडी की चार्जशीट में परीक्षा में धांधली, पेपर लीक और ओएमआर शीट में हेराफेरी के गंभीर आरोप

Lok Bimb
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पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते पर ब्लैकलिस्टेड एजेंसी को काम देने का आरोप; नौकरी के लिए 80 लाख से 1 करोड़ रुपये तक वसूली का दावा

रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, प्रश्नपत्र लीक और ओएमआर शीट में हेराफेरी की जांच कर रही अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) ने अपनी चार्जशीट में कई गंभीर आरोप लगाए हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, पूर्व जेपीएससी अध्यक्ष एल. खियांग्ते पर परीक्षा संचालन में कथित गड़बड़ियों, निजी एजेंसी को नियमों के विपरीत काम सौंपने और डिजिटल साक्ष्य मिटाने की कोशिश करने के आरोप हैं।

विरोध करने पर परीक्षा नियंत्रक के अधिकार छीने जाने का आरोप

सीआईडी की चार्जशीट के अनुसार, तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते ने कथित आपराधिक साजिश के तहत परीक्षा संचालन का काम एक निजी एजेंसी को सौंपा था।

यह एजेंसी मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) बताई गई है, जिसे कथित तौर पर तथ्यों को छिपाने के मामले में मई 2025 में तीन साल के लिए ब्लैकलिस्ट किया गया था। इसके बावजूद एजेंसी को वैध निविदा प्रक्रिया के बजाय नामांकन के आधार पर काम सौंपे जाने का आरोप है।

चार्जशीट के मुताबिक, तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक असीम केरकेट्टा ने जब इस एजेंसी की नियुक्ति पर आपत्ति जताई, तो खियांग्ते ने कथित तौर पर उनके अधिकार सीमित कर दिए और परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता को सौंप दी।

सीआईडी के अनुसार, गवाह रुद्र प्रताप ने भी अपने बयान में इस घटनाक्रम की पुष्टि की है। आरोप यह भी है कि श्वेता कुमारी गुप्ता का दूसरे विभाग में तबादला होने के बावजूद उन्हें जेपीएससी में ही बनाए रखा गया।

छापेमारी के बाद इस्तीफा, डिजिटल साक्ष्य मिटाने की कोशिश का आरोप

चार्जशीट में उल्लेख है कि 22 जुलाई 2026 को जेपीएससी कार्यालय में सीआईडी की छापेमारी के तुरंत बाद तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।

जांच एजेंसी का आरोप है कि उन्होंने अपने पास मौजूद सरकारी लैपटॉप और पेन ड्राइव से डिजिटल साक्ष्य मिटाने की कोशिश की। हालांकि, सीआईडी के मुताबिक, फॉरेंसिक जांच के दौरान हटाए गए महत्वपूर्ण डेटा को दोबारा प्राप्त कर लिया गया।

नौकरी के लिए 80 लाख से 1 करोड़ रुपये तक वसूली का आरोप

सीआईडी की जांच में अभ्यर्थियों से नौकरी दिलाने के नाम पर भारी रकम वसूले जाने के आरोप भी सामने आए हैं। जांच के अनुसार, प्रारंभिक परीक्षा पास कराने के लिए कथित तौर पर 5 लाख से 10 लाख रुपये तक मांगे जाते थे, जबकि अंतिम चयन के लिए 80 लाख से 1 करोड़ रुपये तक की रकम तय होने का दावा किया गया है।

तकनीकी जांच के आधार पर सीआईडी ने आरोप लगाया है कि एल. खियांग्ते परीक्षा में कथित धांधली से जुड़े सिंडिकेट और निजी एजेंसी के प्रमुख सदस्यों के सीधे संपर्क में थे।

चार्जशीट में यह भी आरोप लगाया गया है कि सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2026 की आधिकारिक उत्तर कुंजी जारी होने से पहले उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता ने अपने मोबाइल फोन से टीडीपीएल कर्मचारी उस्मान को व्हाट्सऐप के माध्यम से उत्तर कुंजी भेजी थी।

एफआरओ और एसीएफ परीक्षाओं की ओएमआर शीट में बड़े पैमाने पर हेराफेरी का दावा

जांच में कथित तौर पर यह भी सामने आया कि वन क्षेत्र पदाधिकारी (एफआरओ) मुख्य परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाएं आयोग के कार्यालय से बाहर निजी कंप्यूटरों पर मिली थीं।

सीआईडी के अनुसार, कथित सिंडिकेट ने एफआरओ परीक्षा की 350 से अधिक और सहायक वन संरक्षक (एसीएफ) परीक्षा की 150 से अधिक ओएमआर शीट में हेराफेरी की थी।

जांच एजेंसी ने अदालत में गवाहों के बयान, दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जमा कर दिए हैं। अब न्यायिक प्रक्रिया के तहत आरोपियों को नोटिस जारी किए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है।

चार्जशीट में लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय अदालत द्वारा साक्ष्यों और न्यायिक कार्यवाही के आधार पर लिया जाएगा।

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