डायट पटना में दिशा 2.0 व पीबीएल प्रशिक्षण शुरू, 208 शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण के सिखाए जा रहे गुण

Lok Bimb
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शिक्षको को नई रणनीतियों से किया जा रहा सशक्त :- प्राचार्या

गोपाल विद्यार्थी

पटना : जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट), पटना में सोमवार को दिशा 2.0 मॉड्यूल व प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग पर आधारित पांच दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत की गई है. इस प्रशिक्षण में जिले के विभिन्न विद्यालयों से आए वर्ग 3 से 5 तक के कुल 155 एवं 6 से 8 के 53 शिक्षक हिस्सा ले रहे हैं. कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों की शैक्षणिक क्षमता को मजबूत करना और स्कूलों में पढ़ाई के स्तर को बेहतर बनाना है. प्रशिक्षण के पहले दिन ही शिक्षकों में खासा उत्साह देखने को मिला. सभी प्रतिभागी नई शिक्षण तकनीकों को सीखने और उन्हें अपने विद्यालयों में लागू करने को लेकर उत्साहित नजर आए.

बाल-केंद्रित शिक्षा पर दिया जा रहा जोर

इस प्रशिक्षण का मुख्य फोकस बाल-केंद्रित शिक्षण पद्धति को मजबूत करना है. इसके तहत शिक्षकों को यह बताया जा रहा है कि कैसे बच्चों की समझ और रुचि के अनुसार पढ़ाई को आसान और रोचक बनाया जा सकता है. कार्यक्रम में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और एनसीऐकों 2023 के अनुरूप पढ़ाई को प्रभावी बनाने के तरीकों पर विशेष चर्चा हो रही है. प्रशिक्षकों द्वारा गतिविधि अधिगम और दक्षता आधारित शिक्षा के महत्व को विस्तार से समझाया जा रहा है.

शिक्षकों को नई रणनीतियों से किया जा रहा सशक्त

प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए डायट की प्राचार्या डॉ श्रुति चौबे ने कहा कि दिशा 2.0 मॉड्यूल व प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग शिक्षकों के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है. इसके जरिए उन्हें आधुनिक शिक्षण रणनीतियों से अवगत कराया जा रहा है. उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण से शिक्षक न केवल अपने ज्ञान को बढ़ाते हैं, बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास में भी अहम भूमिका निभाते हैं. उनका मानना है कि बेहतर शिक्षक ही बेहतर समाज की नींव रखते हैं.

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की नींव है प्रशिक्षण

वरीय व्याख्याता डॉ विनय कुमार चौधरी, व्याख्याता प्रो विपिन कुमार, प्रो विनय कुमार, प्रो कुमारी सीमा सिंह , प्रो. सावित्री चौधरी व साधन सेवी अजय कुमार ने भी प्रशिक्षण के महत्व पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि जब तक शिक्षकों को सही और आधुनिक प्रशिक्षण नहीं मिलेगा, तब तक शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार संभव नहीं है. उन्होंने उम्मीद जताई कि इस प्रशिक्षण से मिले अनुभवों का उपयोग शिक्षक अपने-अपने विद्यालयों में करेंगे, जिससे बच्चों के लिए सीखने का माहौल और बेहतर बनेगा.

पांच दिनों तक चलेगा प्रशिक्षण कार्यक्रम

यह आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम पांच दिनों तक चलेगा, जिसमें अलग-अलग सत्रों के माध्यम से शिक्षकों को कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी जाएगी. इसमें कक्षा में व्यवहारिक गतिविधियों, बच्चों के साथ संवाद, और सीखने की प्रक्रिया को आसान बनाने के तरीकों पर विशेष फोकस रहेगा.

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