सुबह दो बजे खुले बाबा उगना महादेव मंदिर के पट, देर शाम तक आस्था की बहती रही अविरल धारा
•22 प्वाइंट पर सुरक्षा, फिर भी भीड़ में सक्रिय रहे चेन स्नेचर और जेबकतरे
मोहम्मद जमशेद / पदमाकर सिंह लाला
समस्तीपुर/विद्यापतिनगर : श्रावण मास की पहली सोमवारी व नागपंचमी के शुभ संयोग पर मिथिलांचल की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र विद्यापतिधाम स्थित बाबा उगना महादेव बालेश्वर स्थान मंदिर सोमवार को शिवभक्तों के सैलाब से पट गया। अल सुबह दो बजे मंगल आरती और विशेष पूजा-अर्चना के साथ मंदिर के पट खुलते ही जलाभिषेक का सिलसिला शुरू हुआ, जो देर शाम तक अनवरत चलता रहा। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर व मेला क्षेत्र दिनभर ‘हर-हर महादेव’, ‘बोल बम’ और ‘ऊँ नमः शिवाय’ के आध्यात्मिक उद्घोष से गूंजता रहा। मंदिर न्यास समिति के कोषाध्यक्ष रत्न शंकर भारद्वाज के अनुसार पहली सोमवारी व नाग पंचमी पर करीब 50 हजार श्रद्धालुओं ने बाबा उगना महादेव का जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना की रविवार रात से ही उमड़ने लगी थी श्रद्धालुओं की भीड़ रविवार शाम ढलते ही कांवरियों और श्रद्धालुओं का विद्यापतिधाम पहुंचना शुरू हो गया था। पूरी रात मंदिर परिसर, मुख्य सड़क और मेला क्षेत्र श्रद्धालुओं से गुलजार रहा। सोमवार की अल सुबह लंबी कतारों के बीच श्रद्धालुओं ने मंदिर में प्रवेश कर जलाभिषेक किया। बिहार के विभिन्न जिलों के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों से भी हजारों श्रद्धालु बाबा के दरबार में पहुंचे थे। भांग, धतूरा और बेलपत्र से हुआ बाबा का अभिषेक पहली सोमवारी और नागपंचमी के विशेष संयोग के कारण श्रद्धालुओं ने गंगाजल, दूध, भांग, धतूरा, बेलपत्र, आक के पुष्प और चंदन अर्पित कर भोलेनाथ का रुद्राभिषेक किया। मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा-अर्चना का क्रम चलता रहा। श्रद्धालुओं ने परिवार की खुशहाली, अच्छी सेहत और सुख-समृद्धि की कामना की।22 स्थानों पर सुरक्षा, कंट्रोल रूम से रखी गई नजर श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। मेला क्षेत्र के 22 महत्वपूर्ण स्थानों पर दंडाधिकारी, पुलिस पदाधिकारी और पुलिस बल की तैनाती की गई थी। महिला श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए महिला पुलिसकर्मियों और स्वयंसेवकों को लगाया गया। सीओ कुमार हर्ष कंट्रोल रूम से सीसीटीवी कैमरों के जरिए पूरे मेला क्षेत्र की लगातार निगरानी करते दिखे। वहीं थानाध्यक्ष सूरज कुमार सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी दिनभर कैंप कर पूरी मुस्तैदी के साथ मेला की व्यवस्था का जायजा लेते रहे। यातायात व्यवस्था में भी किया गया बदलाव भीड़ नियंत्रण के लिए मंदिर परिसर में बैरिकेडिंग की गई थी। प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग मार्ग निर्धारित किए गए। बजरंगी चौक से सुहानी पुल तक बड़े वाहनों के परिचालन पर रोक रही, जबकि मंदिर जाने वाले मुख्य मार्ग पर सामान्य वाहनों के प्रवेश को भी प्रतिबंधित किया गया। भीड़ का फायदा उठाकर सक्रिय रहे चेन स्नेचर और जेबकतरे धार्मिक आस्था के बीच भीड़ का फायदा उठाकर चेन स्नेचर और जेबकतरे भी सक्रिय रहे। कई शाहपुर पटोरी स्थित चकराजअली निवासी निशा कुमारी, सुल्तानपुर गांव निवासी दीपांशु कुमार सिंह के डेढ़ – डेढ़ भर के सोने की चेन सहित अन्य महिला श्रद्धालुओं के मंगलसूत्र और अन्य आभूषण झपट लिए गए। वहीं कई श्रद्धालुओं की जेब काटकर नकदी भी उड़ा ली गई। पीड़ितों ने मेला ड्यूटी में तैनात पुलिस अधिकारियों को आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने बताया कि शिकायतों के आधार पर जांच शुरू कर दी गई है। न्यास समिति के कोषाध्यक्ष रत्न शंकर भारद्वाज ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज के जरिए संदिग्धों की पहचान का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की धार्मिक व भीड़ भाड़ वाले जगहों पर कीमती सामान व स्वर्णाभूषण पहन कर नहीं जाएं। सुरक्षा के बावजूद उठे सवाल हालांकि प्रशासन ने पहली सोमवारी को लेकर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे, लेकिन भीड़ के बीच चेन स्नेचिंग और जेबकटिंग की घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल भी खड़े कर दिए। श्रद्धालुओं का कहना है कि हर वर्ष मेले में इस तरह की घटनाएं सामने आती हैं। ऐसे में अगले सोमवारों को देखते हुए भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में सादे लिबास में पुलिसकर्मियों की संख्या बढ़ाने और निगरानी को और मजबूत करने की जरूरत है।


