सोमवार को हुई भारी बारिश से महसई मोहल्ला जलमग्न, घरों में घुसा पानी ,अतिक्रमण से नाली जाम थमी पानी निकासी

Lok Bimb
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सनोज कुमार संगम

रजौली : नगर पंचायत के महसई मोहल्ले में सोमवार शाम हुई मूसलाधार बारिश ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दीं। वॉर्ड संख्या 12 और 13 के कई घरों में बारिश का पानी घुस गया, जिससे परिवारों को रातभर परेशानी झेलनी पड़ी। गलियों में जलजमाव होने से लोगों का आवागमन भी प्रभावित रहा। स्थानीय लोग घरों में पानी भरने के साथ ही सांप-बिच्छू निकलने के डर से भी सहमे हुए हैं।
सूचना मिलने पर नगर पंचायत के कर्मियों मौके पर  पहुंचे और जेसीबी मशीन लगवाकर पानी निकासी की वैकल्पिक व्यवस्था शुरू कराई। उन्होंने बताया कि पहले इस इलाके में आहर था, लेकिन समय के साथ जमीन की खरीद-बिक्री अवैध तरीके से कर देने के बाद मकान बन गए। प्राकृतिक जल निकासी का रास्ता बंद होने से थोड़ी देर की तेज बारिश में भी पानी जमा हो जाता है।इस संबंध में टकुआटांर के
पूर्व मुखिया राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि बिहार सरकार की थाना संख्या-183, प्लॉट संख्या-1129 और खाता संख्या-395 की भूमि पर अतिक्रमण होने से समस्या और गंभीर हो गई है। उनका कहना है कि नक्शे में यह भूमि आज भी सरकारी आहर दर्ज है। यदि अतिक्रमण हटाकर पुराने नाले का निर्माण कराया जाए तो बारिश का पानी आसानी से निकल सकेगा और हर वर्ष होने वाली जलजमाव की समस्या से लोगों को स्थायी राहत मिल सकती है।
स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और नगर पंचायत से मांग की है कि जल निकासी की स्थायी व्यवस्था, नालों की नियमित सफाई और सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई जल्द शुरू की जाए, ताकि भविष्य में बारिश के दौरान लोगों को ऐसी परेशानी का सामना न करना पड़े।भारी बारिश से महसई मोहल्ला जलमग्न, घरों में घुसा पानी; अतिक्रमण से थमी जल  निकासी के समस्या का समाधान।हो जाएगा । इस संबंध में वार्ड 13 के वार्ड पार्षद  मेवालाल ने बताया कि महसई  मोहल्ला के नसीम मियां के द्वारा नाला के मुख्य निकासी में ही घर का सीढ़ी बना दिया गया है जिससे नाले का पानी निकालने का कोई भी साधन नहीं है जिसको लेकर यह मोहल्ला थोड़ा सा भी वर्षा होती है तो वर्षा का पानी घरों में घुस जाता है जिसको जल्द से जल्द सीढ़ी को तोड़कर अतिक्रमण मुक्त किया जाए तभी जल निकासी का कोई व्यवस्था सुगम तरीके से हो सकेगा। अतिक्रमण को लेकर नगर पंचायत के पदाधिकारी व मुख्य  पार्षद को लिखकर दर्जनों बार  दिया गया उसके बाद भी अतिक्रमण मुक्त नहीं किया गया।

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