– हेमन्त अहीर
रांची : जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में कथित धांधली के विरोध में राजधानी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहे छात्र आंदोलन के बीच सरकार से वार्ता की तैयारी शुरू हो गई है। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे जेपीएससी – जेएसएससी रिफॉर्म मंच ने बातचीत के लिए अपना प्रतिनिधिमंडल घोषित कर दिया है। छात्रों ने कहा है कि वे सरकार से बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन वार्ता पूरी तरह पारदर्शी और सार्वजनिक होनी चाहिए।
प्रतिनिधिमंडल में आठ छात्र शामिल किए गए हैं। इनमें रविन्द्र पासवान, पीयूष कुमार सिंह, रविन्द्र कुमार रवि, राजेश प्रसाद, नीतू कुजूर, कार्तिक सोरेन, संदीप कुमार और शालू सिंह शामिल हैं। छात्रों का कहना है कि आंदोलन छात्रों का है, इसलिए सरकार के सामने उनकी सभी मांगें और सुझाव केवल छात्र प्रतिनिधि ही रखेंगे।
छात्रों ने प्रतिनिधिमंडल में रांची प्रेस क्लब के अध्यक्ष शंभूनाथ चौधरी, द लल्लनटॉप के वरिष्ठ पत्रकार विकास वर्मा और पूर्व महाधिवक्ता अजीत कुमार को अभिभावक एवं मार्गदर्शक के रूप में शामिल किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये तीनों वार्ता में किसी भी मुद्दे पर अपनी राय नहीं रखेंगे। इनकी भूमिका केवल छात्रों का मार्गदर्शन करने और प्रक्रिया की पारदर्शिता बनाए रखने तक सीमित रहेगी।

आंदोलनकारी छात्रों ने यह भी कहा कि बैठक में शामिल होने वाले पत्रकार किसी भी प्रकार का कैमरा, माइक या रिकॉर्डिंग उपकरण लेकर अंदर प्रवेश नहीं करेंगे। उनकी मौजूदगी केवल अभिभावक के रूप में होगी।
इससे पहले बुधवार को सदर एसडीओ कुमार रजत आंदोलन स्थल पहुंचे थे। उन्होंने सरकार की ओर से पांच सदस्यीय छात्र प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत का प्रस्ताव दिया था। छात्रों ने इस प्रस्ताव का स्वागत किया, लेकिन कहा कि बातचीत बंद कमरे में नहीं होनी चाहिए।
छात्रों का कहना है कि यह आंदोलन लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ा है। इसलिए सरकार के साथ होने वाली वार्ता मीडिया की मौजूदगी में सार्वजनिक रूप से होनी चाहिए, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहे और किसी तरह की गलतफहमी की स्थिति न बने।
इधर, जेएलकेएम के केंद्रीय उपाध्यक्ष देवेन्द्र नाथ महतो की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल तीसरे दिन भी जारी रही। उन्हें समर्थन देने के लिए डुमरी विधायक जयराम कुमार महतो, सिंदरी विधायक चन्द्रदेव महतो, निरसा विधायक अरूप चटर्जी, बगोदर के पूर्व विधायक विनोद कुमार सिंह सहित कई जनप्रतिनिधि और समाजसेवी आंदोलन स्थल पहुंचे।
छात्रों ने कहा कि उनका उद्देश्य सरकार से टकराव नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को रखना है। अब सभी की नजर सरकार के अगले कदम पर है। यदि वार्ता के स्वरूप पर दोनों पक्ष सहमत होते हैं, तो जेपीएससी – जेएसएससी परीक्षा विवाद को लेकर चल रहे आंदोलन में अहम प्रगति हो सकती है।


