महाअष्टमी पर मां महागौरी की पूजा-अर्चना के लिए उमड़े श्रद्धालु, कल होगा संधि पूजन

Lok Bimb
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108 कमल पुष्पों से होगी मां दुर्गा की आराधना, 108 दीपक किए जाएंगे प्रज्वलित; पूजा पंडालों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

फातेह आलम तालझारी

साहिबगंज : शारदीय नवरात्र के महाअष्टमी पर्व पर रविवार को साहिबगंज शहर सहित जिलेभर के दुर्गा मंदिरों में श्रद्धा और भक्ति का माहौल रहा। सुबह से ही मां दुर्गा की पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं का मंदिरों में पहुंचना शुरू हो गया। मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा के बाद सुबह 8:30 बजे से आठवें स्वरूप मां महागौरी की आराधना की गई। इस दौरान मां दुर्गा सवाहन सपरिवार पूजन, नवपत्रिका पूजन, पंचलोकपाल पूजन और बेदी पूजन सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए गए। इसके बाद मां को भोग अर्पित कर आरती की गई। गोराबाड़ी हटिया दुर्गा मंदिर के पुरोहित सुशील कुमार पांडे ने बताया कि रविवार की देर रात निशा पूजन किया जाएगा। वहीं, सोमवार को सुबह 7:26 बजे से 8:14 बजे तक संधि पूजन होगा। इस दौरान मां दुर्गा को 108 कमल पुष्प अर्पित किए जाएंगे तथा 108 दीपक प्रज्वलित कर विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी।

संधि पूजन का विशेष धार्मिक महत्व

पुरोहित सुशील कुमार पांडे ने बताया कि संधि पूजन महाअष्टमी के अंतिम 24 मिनट और महानवमी के शुरुआती 24 मिनट के संधिकाल में किया जाता है। इस प्रकार कुल 48 मिनट की अवधि में संधि पूजन संपन्न होता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी संधिकाल में मां दुर्गा ने चंड और मुंड नामक असुरों का वध कर चामुंडा स्वरूप धारण किया था। इसलिए इस समय को विशेष शक्तिशाली और शुभ माना जाता है। परंपरा के अनुसार, संधि पूजन के दौरान मां दुर्गा को 108 कमल पुष्प अर्पित करने और 108 दीपक प्रज्वलित करने का विधान है। श्रद्धालु इस दौरान विशेष पूजा-अर्चना और मंत्र जाप कर सुख-समृद्धि तथा परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं। संधि पूजन के बाद महानवमी तिथि का प्रवेश होगा।

मंदिरों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

महाअष्टमी के अवसर पर शहर सहित जिले के विभिन्न दुर्गा मंदिरों और पूजा पंडालों में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी है। पर्व को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। विभिन्न पूजा स्थलों पर मजिस्ट्रेट और पुलिस बल की तैनाती की गई है, ताकि श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के पूजा-अर्चना कर सकें।

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