डीसीएलआर पद पर प्रोन्नति व मंत्री परिषद के निर्णय को वापस लेने की मांग
गोपाल विद्यार्थी
पटना : एक ओर प्रदेश की सरकार सामुहिक अवकाश सह हड़ताल पर चल रहे राजस्व सेवा के अधिकारियों को सख्त कार्रवाई की चेतावनी दे रही है, वहीं दूसरी ओर बिहार राजस्व सेवा के अधिकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। इधर अधिकारियों के सामुहिक अवकाश से दाखिल खारिज समेत जमीन सम्बन्धित आम लोगों के कार्य प्रभावित हो रहे हैं | अपनी मांगों को लेकर सामूहिक अवकाश सह हड़ताल पर चल रहे करीब 700 पदाधिकारी गायघाट स्थित केएल-7 सभागार में जुटे और आंदोलन को और तेज करने का ऐलान किया। प्रदेश के विभिन्न जिलों से पहुंचे महिला-पुरुष अधिकारियों ने भूमि सुधार उप समाहर्ता (डीसीएलआर) समेत पदोन्नति के अन्य पदों पर अपनी पदस्थापना की मांग दोहराई।बिहार राजस्व सेवा महासंघ संयुक्त मोर्चा के बैनर तले आयोजित सभा में वक्ताओं ने कहा कि उच्च न्यायालय भी उनकी पदस्थापना को उचित ठहरा चुका है। इसके बावजूद मंत्रिपरिषद द्वारा डीसीएलआर पद को राजस्व सेवा से हटाकर सामान्य प्रशासन विभाग के अधीन करना न्यायसंगत नहीं है।

वक्ताओं ने आरोप लगाया कि सामूहिक अवकाश पर गए अधिकारियों को कार्यस्थल पर लौटाने के लिए सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है। उनका कहना था कि डीसीएलआर पद को बिहार प्रशासनिक सेवा के लिए आरक्षित करना एकतरफा निर्णय है, जो न्यायालय के आदेश की भावना के खिलाफ है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक न्यायालय के आदेश को लागू नहीं किया जाता और मंत्रिपरिषद का निर्णय वापस नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन शांतिपूर्ण, वैधानिक और लोकतांत्रिक तरीके से जारी रहेगा। सभा को संबोधित करते हुए मोर्चा के समन्वयक व बिरसा यूनाइटेड के अध्यक्ष शिव शंकर गुप्ता, अध्यक्ष आनंद कुमार, गोप गुट के अध्यक्ष चंद्रशेखर चौबे, महासचिव नारायण शर्मा और बिहार सहकारिता प्रसार अधिकारी संघ के महासचिव शशिभूषण कुमार समेत अन्य नेताओं ने सरकार के फैसले पर नाराजगी जताई। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि सीओ – आरओ का सामूहिक अवकाश न तो खत्म हुआ है और न ही कमजोर पड़ा है। उन्होंने दावा किया कि कुछ अपवादों को छोड़कर कोई भी अधिकारी काम पर नहीं लौटा है और प्रतिदिन अवकाश पर जाने वालों की संख्या बढ़ रही है।


