ईचागढ़ : सरायकेला-खरसावां जिले के ईचागढ़ प्रखंड अंतर्गत लाबा गांव में बुधवार को आस्था, भक्ति और तपस्या का ऐसा अद्भुत संगम देखने को मिला, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। चड़क पूजा के अवसर पर यहां एक महिला ने जलती व लहलहाती आग पर चलकर भगवान शिव के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा का प्रदर्शन किया, वहीं उनके पति ने अपनी पीठ में लोहे का हुक घोंपकर 40 फीट ऊंचाई पर चरखी से झूलते हुए भक्ति का अनोखा उदाहरण प्रस्तुत किया।
करीब 50 वर्षीय बुटन ग्वालीन पिछले 15 वर्षों से लगातार इस कठिन तपस्या को करती आ रही हैं। हर वर्ष चड़क पूजा के दौरान वे लहलहाती आग में नंगे पैर चलती हैं, जिसे स्थानीय लोग भगवान शिव को प्रसन्न करने का माध्यम मानते हैं। ग्रामीणों के अनुसार, बुटन ग्वालीन की यह साधना केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि उनकी गहरी आस्था और विश्वास का प्रतीक है।
वहीं उनके पति सोमा गोप ने भी इस अवसर पर अपनी पीठ में लोहे का हुक घोंपकर लकड़ी से बने बल्ले पर लटकते हुए करीब 40 फीट ऊपर तक झूलकर भगवान शिव की आराधना की। यह दृश्य देखने के लिए आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे। पूरे क्षेत्र में “हर-हर महादेव” के जयकारों से माहौल भक्तिमय हो गया।

ग्रामीणों का मानना है कि इस तरह की कठोर तपस्या से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और परिवार तथा गांव पर अपनी कृपा बनाए रखते हैं। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और आज भी पूरी श्रद्धा के साथ निभाई जा रही है।
हालांकि इस प्रकार की धार्मिक गतिविधियों को लेकर स्वास्थ्य और सुरक्षा के दृष्टिकोण से सवाल भी उठते हैं, लेकिन स्थानीय लोग इसे अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक आस्था से जोड़कर देखते हैं। बुटन ग्वालीन ने बताया कि लहलहाती आग पर भगवान शिव जी की असीम कृपा से चलती हूं, जिसमें न कपड़े और न ही कहीं आग से जलता है और लोहे का हुक पीठ के चमड़े पर घोंपा जाता है और रस्सी के सहारे चकरी में लटकाकर घूमते हैं,जिसमें न ही खुन निकलता है ओर न ही घाव पर मरहम पट्टी लगाया जाता है। उन्होंने कहा कि यह परम्परा सिर्फ भोले बाबा के कृपा से ही संभव है।


