प्रसाद इन्द्रजीत
जामताड़ा : झारखंड में सहायक अध्यापकों की समस्याओं को लेकर एक बार फिर आंदोलन तेज होता दिख रहा है। सहायक अध्यापक संघर्ष मोर्चा की प्रखंड इकाई की महत्वपूर्ण बैठक रविवार को स्थानीय ब्लॉक फुटबॉल ग्राउंड में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता प्रखंड अध्यक्ष निजामुद्दीन अंसारी ने की, जिसमें बड़ी संख्या में सहायक अध्यापक शामिल हुए।बैठक को संबोधित करते हुए अध्यक्ष अंसारी ने राज्य की हेमंत सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सरकार ने पूर्व में आकलन पास सहायक अध्यापकों को TET के समकक्ष मान्यता देने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। इसे उन्होंने दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि सरकार अपने वादों से पीछे हट रही है, जिससे शिक्षकों में भारी आक्रोश है।उन्होंने आगे कहा कि सहायक अध्यापक आज बदहाल जीवन जीने को मजबूर हैं, लेकिन उनकी समस्याओं की सुध लेने वाला कोई नहीं है। इसी के विरोध में राज्य नेतृत्व के निर्देश पर 18 अप्रैल को मुख्यमंत्री आवास घेराव का निर्णय लिया गया है। इस आंदोलन को सफल बनाने के लिए कोष संग्रह करने का भी फैसला बैठक में लिया गया।वही 12 अप्रैल को स्थानीय विधायक सह झारखंड विधान सभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो को मांग पत्र सौपने का निर्णय लिया गया।बैठक में 14 अप्रैल को जिला स्तर पर होने वाली बैठक में अधिक से अधिक सहायक अध्यापकों की भागीदारी सुनिश्चित करने की अपील की गई। साथ ही विभाग से जल्द अगली आकलन परीक्षा आयोजित कराने की मांग भी उठाई गई। रांची में प्रस्तावित धरना कार्यक्रम में प्रखंड से अधिक से अधिक शिक्षकों की भागीदारी पर भी जोर दिया गया। मौके पर बारघरियया सीआरसी अध्यक्ष नैनी प्रसाद गोरांई ने कहा कि वर्ष 2018 के आंदोलन को फिर से दोहराया जाएगा और इस बार आंदोलन और भी व्यापक होगा। उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि इस बार रांची की धरती को अस्त-व्यस्त कर दिया जाएगा।उन्होंने अन्य राज्यों जैसे बिहार, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां पारा शिक्षकों को स्थायीकरण और सम्मानजनक मानदेय मिल रहा है, जबकि झारखंड में शिक्षक आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।श्री गोरांई ने सवाल करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश है समान काम का समान वेतन, तो क्या कोर्ट से भी बड़े है राज्य सरकार?उन्होने सरकार पर आरोप लगाते हुए सवाल उठाया कि क्या झारखंड के पारा शिक्षकों के लिए अलग कानून है?बैठक में सभी शिक्षकों से अपील की गई कि वे चट्टानी एकता का परिचय देते हुए अपने अधिकारों के लिए 18 अप्रैल को मुख्यमंत्री आवास पर प्रस्तावित महाधरना सह आमरण अनशन में अधिक से अधिक संख्या में शामिल हों।इस अवसर पर वसीम अकरम, सुशील मंडल, तपन पटनायक, आलोक भूई, निर्मल मंडल, शिवनारायण सामंत, रानी हेम्ब्रम, तपन मांझी सहित दर्जनों सहायक अध्यापक उपस्थित रहे।बैठक में सरकार के खिलाफ नाराजगी स्पष्ट दिखी और आने वाले दिनों में बड़े आंदोलन की रणनीति तैयार की गई।


