भारत में टोकनाइज्ड कमोडिटीज: अवसर, संभावनाएं और विस्तार की राह

Lok Bimb
4 Min Read

नई दिल्ली : हर साल भारत के घरों और मंदिरों में खरबों रुपये का सोना बंद पड़ा रहता है, जिसका आर्थिक उपयोग बहुत सीमित होता है। दूसरी ओर, गेहूं, कपास और धातुओं की करोड़ों टन मात्रा ऐसे बाजारों से गुजरती है, जो बड़े होने के बावजूद अब भी काफी हद तक कागजी प्रक्रियाओं पर चलते हैं। भारत की विशाल कमोडिटी संपदा और उसके वित्तीय उपयोग के बीच यही अंतर वह चुनौती है, जिसे टोकनाइजेशन दूर करने की कोशिश करता है। टोकनाइजेशन का अर्थ किसी वास्तविक संपत्ति—जैसे एक ग्राम सोना, कपास की एक गांठ या एक टन तांबा—के स्वामित्व को ब्लॉकचेन पर एक डिजिटल टोकन के रूप में दर्ज करना है। ब्लॉकचेन एक साझा और छेड़छाड़-रोधी डिजिटल रिकॉर्ड है, जिसे सत्यापित किया जा सकता है। किसी टोकन का मूल्य इस बात पर निर्भर करता है कि उसके पीछे कमोडिटी पर वास्तविक और सत्यापित दावा है या नहीं, वह उचित कस्टडी में रखी गई है या नहीं और उसे वापस प्राप्त करने का स्पष्ट रास्ता मौजूद है या नहीं। सही तरीके से लागू होने पर यह बड़ी और अविभाज्य संपत्तियों को छोटी और किफायती इकाइयों में बांट सकता है, कागजी प्रक्रिया के बजाय स्वामित्व का तत्काल हस्तांतरण संभव बना सकता है और रिकॉर्ड की जांच आसान करके धोखाधड़ी की गुंजाइश कम कर सकता है। वर्चुअल डिजिटल एसेट (वीडीए) उद्योग ने इस विचार को एक काम करने वाले बाजार में बदलने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई है। दुनियाभर में टोकनाइज्ड कमोडिटीज में हर महीने 7.12 अरब डॉलर का ट्रांसफर वॉल्यूम दर्ज किया जा रहा है। इस बाजार में करीब 3.2 लाख धारक और 40 से अधिक ट्रैक किए जा रहे उत्पाद शामिल हैं। गोल्ड-बैक्ड टोकन इस बाजार पर हावी हैं। पैक्सोस गोल्ड और टीथर गोल्ड मिलकर बाजार के करीब तीन-चौथाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं। दोनों के जरिए धारकों को वास्तविक सोने पर दावा मिलता है, जिसे ऑडिट किए गए वॉल्ट में रखा जाता है और जारीकर्ता के माध्यम से रिडीम किया जा सकता है। वीडीए उद्योग द्वारा विकसित क्रिप्टो एक्सचेंज, डिजिटल वॉलेट और ब्लॉकचेन इंफ्रास्ट्रक्चर ने छोटे हिस्सों में बंटे इन एसेट्स में चौबीसों घंटे कारोबार को संभव बनाया है। स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट यानी खुद निष्पादित होने वाला कोड, उन सेटलमेंट प्रक्रियाओं को स्वचालित करता है जिनमें पहले कई दिन और काफी कागजी कार्रवाई लग सकती थी। नीति निर्माताओं के सामने अब स्पष्ट कार्य है: ऐसा नियामकीय दायरा तैयार करना जो टोकन को लागू किए जा सकने वाले संपत्ति अधिकारों से जोड़े, बजाय इसके कि हर नियामक अलग-अलग काम करे। साथ ही, क्रिप्टो और वीडीए उद्योग को इस बाजार की ट्रेडिंग और कस्टडी लेयर तैयार करने में संभावित भागीदार के रूप में देखा जाना चाहिए। सही तरीके से लागू होने पर यह केवल एक वित्तीय उत्पाद नहीं होगा; यह भारतीय घरों और किसानों के पास निष्क्रिय पड़ी पूंजी को सक्रिय करने का एक माध्यम बन सकता है—उसी तकनीक के जरिए, जिसने टोकनाइजेशन को दुनिया में तेजी से बढ़ते एसेट क्लास के रूप में उभरने में मदद की है।

Share This Article
Leave a Comment