आदित्यपुर में आस्था का महासंगम: प्रवीण सिंह सेवा संस्थान के भव्य दुर्गा पूजा पंडाल का खेल मंत्री श्रेयसी सिंह ने किया उद्घाटन, उमड़ा जनसैलाब

Lok Bimb
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सरायकेला/खरसावां : दशकों से आस्था और भव्यता की मिसाल बना आदित्यपुर के एम टाइप स्थित प्रवीण सिंह सेवा संस्थान का दुर्गा पूजा पंडाल इस साल भी अपने दिव्य स्वरूप में सजकर तैयार है। इस भव्य पंडाल का उद्घाटन बिहार सरकार की खेल मंत्री श्रेयसी सिंह ने फीता काटकर किया। उद्घाटन समारोह में हजारों श्रद्धालुओं और गणमान्य लोगों की उपस्थिति ने पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया।

मां दुर्गा के जयकारों और ढोल-नगाड़ों के बीच जब मंत्री श्रेयसी सिंह पंडाल परिसर में पहुंचीं तो श्रद्धालुओं ने उनका भव्य स्वागत किया। उद्घाटन के बाद उन्होंने मीडिया से बात करते हुए संस्थान के इस प्रयास की सराहना की और सभी को दुर्गा पूजा की शुभकामनाएं दीं।

दशकों से आस्था का केंद्र है यह पंडाल

प्रवीण सिंह सेवा संस्थान द्वारा दशकों से यहां दुर्गा पूजा का आयोजन किया जाता रहा है। यह सिर्फ एक पंडाल नहीं, बल्कि पूरे कोल्हान की आस्था का केंद्र बन चुका है। हर साल की तरह इस साल भी कारीगरों ने अपनी अद्भुत कला से मां दुर्गा की विशाल और मनमोहक प्रतिमा का निर्माण किया है, जिसे देखकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो रहे हैं।

रात के समय जब पंडाल की लाइटिंग जलती है तो उसकी खूबसूरती देखते ही बनती है। महल जैसी भव्य संरचना और उसके गर्भगृह में विराजमान मां की जगमगाती प्रतिमा, मानो श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींच रही हो।

जिले ही नहीं, पूरे झारखंड से पहुंच रहे हैं श्रद्धालु

इस पंडाल की ख्याति अब सिर्फ सरायकेला-खरसावां जिले तक सीमित नहीं है। इसे देखने के लिए झारखंड के रांची, धनबाद, बोकारो, चाईबासा सहित कई जिलों से श्रद्धालु बस और ट्रेनों से यहां पहुंचते हैं। लंबी-लंबी कतारों में खड़े होकर लोग पंडाल की एक झलक और मां के दर्शन के लिए आतुर दिखते हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पंडाल लगभग हर वर्ष अपनी बनावट, सजावट और भव्यता के लिए प्रथम पुरस्कार जीतता है। श्रद्धालुओं की नजरें एक बार पंडाल पर पड़ती हैं तो हटने का नाम नहीं लेतीं। ऐसा प्रतीत होता है मानो भक्त मां दुर्गा की दिव्य शक्ति में एकाकार हो रहे हों।

मां की प्रतिमा सिल्वर और एंटीक लुक में बनाई गई है, जो महल जैसी नक्काशीदार दीवारोंऔऔऔऔऔौ के बीच और भी ज्यादा भव्य लग रही है। दस भुजाओं वाली महिषासुर मर्दिनी के रूप में मां दुर्गा राक्षस महिषासुर का वध कर रही हैं। उनके हाथों में त्रिशूल, चक्र और अन्य दिव्य अस्त्र-शस्त्र सुशोभित हैं।

मां के एक तरफ बुद्धि की देवी मां लक्ष्मी और दूसरी तरफ सिद्धि की देवी मां सरस्वती विराजमान हैं, जबकि नीचे गणेश और कार्तिकेय की मनमोहक मूर्तियां भी स्थापित हैं। पूरी प्रतिमा पर सुनहरी मुकुट और आभूषणों की चमक, मां के चेहरे पर अद्भुत शांति और शक्ति दोनों का एहसास करा रही है।

श्रद्धालु जैसे ही पंडाल के गर्भगृह में इस प्रतिमा के सामने पहुंच रहे हैं, उनकी नज़रें वहीं ठहर जा रही हैं। मानो सभी भक्त माता रानी महामाया महाशक्ति मां दुर्गा में एकाकार हो रहे हों।

पूजा समिति ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं।

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