राजकृत मध्य विद्यालय काज़ीगाँव में पूर्व PM चन्द्रशेखर की जयंती और डॉ. राधाकृष्णन की पुण्यतिथि पर विशेष कार्यक्रम

Lok Bimb
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फातेह आलम तालझारी

साहिबगंज :- राजकृत मध्य विद्यालय काज़ीगाँव के प्रांगण में आज देश की दो महान विभूतियों को याद किया गया। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और ‘युवा तुर्क’ के नाम से प्रसिद्ध चन्द्रशेखर की जयंती और पूर्व राष्ट्रपति, महान शिक्षाविद डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की पुण्यतिथि पर एक गरिमामय श्रद्धांजलि सभा और वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन हुआ।
सत्ता नहीं, सिद्धांतों की राजनीति के प्रतीक थे चन्द्रशेखर: डॉ. रणजीत सिंह कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित मॉडल कॉलेज राजमहल के प्राचार्य सह प्रसिद्ध भू-वैज्ञानिक डॉ. रणजीत कुमार सिंह ने चन्द्रशेखर जी के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा चन्द्रशेखर जी सत्ता के पीछे नहीं, बल्कि सिद्धांतों की राजनीति करने वाले नेता थे। उनकी सादगी और स्पष्टवादिता आज की राजनीति के लिए एक आईना है। उनका पूरा जीवन संघर्ष और जनसेवा के लिए समर्पित था।
वृक्षारोपण कर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
इस अवसर को यादगार बनाने के लिए विद्यालय परिसर में वृक्षारोपण किया गया। कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार रहीं अध्यक्षता प्रभारी प्रधानाचार्य राकेश कुमार यादव ने कार्यक्रम की कमान संभाली। अतिथि सत्कार स्कूली बच्चों ने अतिथियों को पौधे भेंट कर उनका स्वागत किया।
बच्चों की सहभागिता अनीषा कुमारी, बादल, ममता, अंशु, प्रियंका और डॉली जैसे विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ पौधे लगाए। सहयोग स्वस्थ व पर्यावरण संरक्षण संस्थान द्वारा वृक्षारोपण हेतु पौधे उपलब्ध कराए गए।
डॉ. राधाकृष्णन को दी गई भावांजलि
इसी क्रम में भारत रत्न डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की पुण्यतिथि पर उन्हें नमन किया गया। वक्ताओं ने भारतीय शिक्षा और दर्शन में उनके अतुलनीय योगदान को याद करते हुए बच्चों को उनके आदर्शों पर चलने की प्रेरणा दी।
कार्यक्रम में शिक्षक आनंद कुमार महतो की सक्रिय भूमिका रही। विशिष्ट अतिथि के रूप में परवीन कुमार एवं सुमित कुमार साह सहित कई स्थानीय गणमान्य लोग और ग्रामीण उपस्थित थे। अंत में, सभी ने समाज में सकारात्मक बदलाव लाने और पर्यावरण की रक्षा करने का संकल्प लिया। यह आयोजन न केवल महापुरुषों के प्रति श्रद्धांजलि था, बल्कि विद्यार्थियों को देश के इतिहास और पर्यावरण के प्रति जागरूक करने का एक सशक्त प्रयास भी सिद्ध हुआ।

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