पदमपुर पंचायत क्षेत्रों के नदी नाला अस्तित्व खतरे में, अवैध मिट्टी खनन पर खून खराबा का संकेत, विभाग के चुपी से सुलग रही है कई गंभीर सवाल
शैलेश सिंह
चतरा : टंडवा क्षेत्र में रेलवे ट्रेक निर्माण में मिट्टी भराई कार्य में लगी कंपनियों के आतंक से एक बार फिर से नदी नाला पर्यावरण पर खतरा के साथ सरकारी राजस्व का बड़ा नुकसान पहुंचाया जा रहा है। ग्रामीणों ने बताया शिवपुरी कठौतिया रेलवे निर्माण में मिट्टी भराई के कार्य में टंडवा के पदमपुर पंचायत के आसपास क्षेत्रों के सरकारी व वन भूमि पर मिलेनियम व झंझरिया कंपनी द्वारा बेगैर जिला प्रशासन की अनुमति व लीज बंदोबस्त के मिट्टी के अवैध खनन की जा रही हैं। इस अवैध मिट्टी खनन में सरकारी नियमों को ताक पर रखकर सरकारी तालाब सहित गोबिंदपुर नदी नाला को गहरी करके मिट्टी खनन की जा रही है। नदी नाला से क्षमता से अधिक मिट्टी खनन से पर्यावरण नुकसान के साथ बड़ा दुर्घटना का कारण बना हुआ है। ग्रामीणों ने कहा विभाग को मौखिक जानकारी देकर कंपनियों पर कार्रवाई की मांग की गई है। मामले में टंडवा प्रभारी सीओ देवलाल उरांव ने कहा मामले को जांच कराई जाएगी गलत पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी। संबंधित क्षेत्र के कर्मचारी और सीआई द्वारा बताया गया कि कंपनी द्वारा अवैध मिट्टी खनन ग्रामीणों द्वारा जानकारी प्राप्त हुई है।
अवैध मिट्टी खनन मामले में पूर्व में हो चुकी है ऐतिहासिक करवाई
अवैध मिट्टी उत्खनन मामले में 2024 में पच्चास लाख से ज्यादा का जुर्माना और राजा कंस्ट्रक्शन पर मामला दर्ज किया गया था। जांच के दौरान से राजा कंस्ट्रक्शन का काम बंद रहा और लास्ट में कंपनी को बाहर का रास्ता देखने पड़ा था। चतरा डीएफओ और डीएमओ के जांच में कई चौंकाने वाले खुलासा हुआ था।
खेतों से मिट्टी उठाने से पूर्व खनन विभाग व प्रशासन से अनुमति लेना अनिवार्य है। नियमों के मुताबिक जमीन स्तर से लेकर डेढ़ मीटर तक मिट्टी उठाई जा सकती है, लेकिन इससे पूर्व संबंधित विभाग ने अनुमति लेना अनिवार्य है। निर्धारित राशि जमा करानी पड़ती है। बिना अनुमति के मिट्टी उत्खनन करना कानूनी अपराध है, जिसके चलते आरोपी को जुर्माने के साथ सजा का प्रावधान किया गया है।


