दिलीप कुमार
नई दिल्ली: भारतीय रेलवे ने स्टेशनों पर यात्रियों के लिए सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पानी की टंकियों और फिल्टरों की सफाई तथा कीटाणुशोधन के लिए विशेष स्वच्छता अभियान शुरू किया है। यह पहल रेलवे में पेयजल गुणवत्ता प्रबंधन को मजबूत करने के लिए तैयार व्यापक कार्ययोजना का हिस्सा है।
इस कार्ययोजना में संपूर्ण पेयजल आपूर्ति प्रणाली के नियमित निरीक्षण और रखरखाव पर विशेष जोर दिया गया है। इसके तहत जल स्रोत और उपभोग स्थल दोनों पर पानी की गुणवत्ता की जांच की जाएगी। पाइपलाइन के अंतिम छोर पर भी पानी का परीक्षण किया जाएगा, ताकि पूरी वितरण प्रणाली में पेयजल की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके।
विशेष अभियान के दौरान क्षेत्रीय रेलवे जल स्रोतों, जल उपचार एवं निस्पंदन संयंत्रों, भूमिगत और ओवरहेड टैंकों, पीवीसी टैंकों, जल बूथों, नलों और जल वितरण केंद्रों का व्यापक निरीक्षण करेंगे। सभी पानी की टंकियों को खाली कर उनकी अच्छी तरह सफाई और कीटाणुशोधन किया जाएगा। वेंट और ओवरफ्लो बिंदुओं को पक्षियों, जानवरों तथा शैवाल से होने वाले प्रदूषण से बचाने के लिए आवश्यक सुरक्षा उपाय भी किए जाएंगे।
अभियान के दौरान ऐसी कमियों की भी पहचान की जाएगी, जिनमें सुधारात्मक कार्रवाई की आवश्यकता है। क्षतिग्रस्त टैंकों, पाइपलाइनों और फिल्टरों की मरम्मत या जरूरत के अनुसार उन्हें बदला जाएगा। साथ ही, यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पीने योग्य और गैर-पीने योग्य जल प्रणालियों के बीच किसी प्रकार का क्रॉस-कनेक्शन न हो। पेयजल आपूर्ति से जुड़ी पाइपलाइनों में रिसाव की जांच की जाएगी और पानी की बर्बादी रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
जहां पेयजल के लिए हैंडपंप और बोरवेल का उपयोग किया जा रहा है, वहां विशेष निगरानी की जाएगी। क्षेत्रीय रेलवे यह सुनिश्चित करेंगे कि इन स्रोतों से प्राप्त पानी पीने के लिए सुरक्षित हो।
पेयजल गुणवत्ता प्रबंधन को मिलेगा बढ़ावा
रेलवे बोर्ड ने क्षेत्रीय रेलवे को वाटर कूलर और जल शोधन प्रणालियों का व्यापक निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। वाटर कूलरों में लगे पानी के टैंकों की पूरी तरह सफाई की जाएगी। कूलर, पाइपलाइनों और नलों में किसी भी प्रकार के रिसाव को तत्काल ठीक किया जाएगा तथा वाटर कूलर के आसपास के क्षेत्रों में पूर्ण स्वच्छता सुनिश्चित की जाएगी।
वाटर कूलरों में लगी यूवी और आरओ प्रणालियों की उचित जांच की जाएगी और आवश्यकता के अनुसार नई प्रणालियां उपलब्ध कराई जाएंगी। निर्धारित रखरखाव, सर्विसिंग और मरम्मत के साथ फिल्टर कैंडल्स तथा अन्य आवश्यक उपकरणों को समय पर बदला जाएगा। नई अथवा प्रतिस्थापन यूवी/आरओ प्रणालियों की स्थापना उनकी स्थिति और आवश्यकता के आधार पर मिशन मोड में की जाएगी।
यही सफाई और गुणवत्ता निगरानी संबंधी उपाय पानी बेचने वाली मशीनों पर भी लागू होंगे। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि इन मशीनों से उपलब्ध कराया जाने वाला पेयजल निर्धारित सुरक्षा और स्वच्छता मानकों के अनुरूप हो।
अधिकारी चिन्हित स्थानों से पानी के नमूने लेकर उनका भौतिक, रासायनिक और जीवाणु संबंधी परीक्षण करेंगे। इन स्थानों में जल स्रोत, उपचार के बाद के निकास बिंदु, टैंक, वाटर कूलर, वेंडिंग मशीन, नल और जल बूथ शामिल होंगे। पानी में अवशिष्ट क्लोरीन की दैनिक निगरानी की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल पुनः क्लोरीनीकरण या अन्य सुधारात्मक कार्रवाई की जाएगी।
बुनियादी ढांचे की निगरानी और सुधारात्मक कार्रवाई
रेलवे बोर्ड ने क्षेत्रीय रेलवे को मौजूदा ओवरहेड और भूमिगत पानी की टंकियों के प्रतिस्थापन तथा नई टंकियों के निर्माण से संबंधित स्वीकृत कार्यों की निगरानी कर उन्हें तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए हैं। स्वीकृत कार्यों का सारांश भी तैयार किया जाएगा और जहां आवश्यक होगा, वहां नए अनुमोदन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
पेयजल आपूर्ति श्रृंखला के विभिन्न चरणों में प्रदूषण की पहचान और उसकी रोकथाम के लिए जल स्रोत से लेकर नल तक उपयुक्त प्रणालियों पर भी काम किया जा रहा है।
क्षेत्रीय रेलवे द्वारा चिन्हित कमियों और उनके समाधान के लिए की गई कार्रवाई का स्टेशनवार विवरण प्रस्तुत किया जाएगा। इससे कमियों की व्यवस्थित निगरानी होगी और विशेष अभियान के दौरान सामने आई समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जा सकेगा।
इस कार्ययोजना के तहत रेलवे कॉलोनियों और कार्यस्थलों में पेयजल अवसंरचना के लिए भी समान उपाय किए जाएंगे। इससे सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल सुनिश्चित करने का दायरा यात्री क्षेत्रों से आगे बढ़ाकर रेलवे कर्मचारियों तक भी विस्तारित होगा।
इन समन्वित उपायों के माध्यम से भारतीय रेलवे पेयजल आपूर्ति प्रणाली में निवारक निरीक्षण, बुनियादी ढांचे के रखरखाव, सफाई, जल गुणवत्ता परीक्षण और सुधारात्मक कार्रवाई की व्यवस्था को मजबूत कर रहा है। इस पहल का उद्देश्य यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों दोनों के लिए सुरक्षित, स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण पेयजल की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करना है।


