फातेह आलम तालझारी
साहिबगंज : भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और संस्कारों की महक को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के उद्देश्य से गायत्री शक्तिपीठ साहिबगंज में ‘भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा’ के सफल प्रतिभागियों के लिए एक भव्य प्रतिभा सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। गरिमामयी वातावरण में संपन्न हुए इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों की सफलता का जश्न मनाया गया और उन्हें भविष्य के लिए नई दिशा दिखाई गई।
मुख्य अतिथि का मंत्र: 8 घंटे पढ़ाई, स्पष्ट लक्ष्य और AI का साथ
समारोह के मुख्य अतिथि मॉडल कॉलेज राजमहल के प्राचार्य डॉ. रणजीत कुमार सिंह ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। अपने ओजस्वी संबोधन में उन्होंने विद्यार्थियों को सफलता के तीन सूत्र दिए प्रतिदिन कम से कम 8 घंटे का समर्पित अध्ययन। जीवन में एक निश्चित लक्ष्य का होना।
तकनीक का सही उपयोग करते हुए Artificial Intelligence (AI) को अपना ट्यूटर बनाने की सलाह।
डॉ. सिंह ने विशेष रूप से भारतीय ज्ञान परंपरा (Indian Knowledge System) पर जोर देते हुए कहा कि अपनी जड़ों से जुड़कर ही हम वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं।
समारोह के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं और विद्यालयों को मेडल, प्रमाण पत्र और पुरस्कार देकर नवाजा गया। मॉडल कॉलेज राजमहल के 5 विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए सम्मान प्राप्त किया।
विद्यालय स्तर की रैंकिंग प्रथम योगी चक सरकंडा विद्यालय
द्वितीय इंटर स्कूल सच्चानग, तृतीय कमला देवी उच्च कन्या विद्यालय अन्य उत्कृष्ट प्रतिभाएं पीएम श्री नवोदय विद्यालय, केंद्रीय विद्यालय और सेंट जेवियर स्कूल के विद्यार्थियों ने भी अपनी मेधा का परिचय दिया।
कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि इस परीक्षा का मूल उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि युवाओं को अपनी समृद्ध विरासत और नैतिक मूल्यों से जोड़ना है।
गरिमामयी उपस्थिति उपजोनन समन्वयक अनिल कुमार, संरक्षक प्रो. वकील पोद्दार और मंच संचालक कल्याण प्रसाद श्रीवास्तव ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
प्रेरक विचार ओम प्रकाश सिंहा, वीरेंद्र प्रसाद चौधरी, श्रीमती रानी श्रीवास्तव (उप मुख्य प्रबंधक, ट्रस्टी) और रानी झा ने बच्चों को संस्कारयुक्त जीवन जीने की प्रेरणा दी।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। बड़ी संख्या में उपस्थित अभिभावकों और गणमान्य नागरिकों ने गायत्री परिवार के इस प्रयास की सराहना की।
संस्कार ही शिक्षा का मूल आधार हैं। जब आधुनिक तकनीक और प्राचीन संस्कृति का संगम होता है, तभी एक श्रेष्ठ राष्ट्र का निर्माण होता है।


