अंगदान के बढ़ावा हेतु लोगों में स्वेच्छा से अंगदान करने की भावना विकसित करना होगा :- डॉ मनीष मंडल
गोपाल विद्यार्थी
पटना : भारतीय अंगदान दिवस को लेकर राज्य अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (सोट्टो ), बिहार द्वारा इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान के ओपीडी परिसर में एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित की गई। कार्यक्रम का उद्देश्य अंगदान के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना, समाज में व्याप्त भ्रांतियों को दूर करना तथा अधिक से अधिक लोगों को अंगदान के लिए प्रेरित करना था।कार्यक्रम का शुभारंभ सोट्टो बिहार के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) मनीष मंडल के स्वागत उद्बोधन से हुआ। मौके पर उन्होंने कहा कि जब हमें किसी अंग की आवश्यकता होती है, तब हम उसे प्राप्त करना चाहते हैं, लेकिन जब स्वयं अंगदान करने की बात आती है तो हम पीछे हट जाते हैं। यदि समाज में अंगदान को बढ़ावा देना है, तो लोगों में स्वेच्छा से आगे आकर अंगदान करने की भावना विकसित करनी होगी। उन्होंने सभी से अंगदान के प्रति सकारात्मक सोच अपनाने और इस जनहितकारी अभियान से जुड़ने का आह्वान किया। इसके पश्चात आईजीआईएमएस के डीन प्रो. (डॉ.) ओम कुमार ने अंगदान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत में प्रत्यारोपण की आवश्यकता वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जबकि उपलब्ध अंगों की संख्या अत्यंत कम है। उन्होंने इस मांग और उपलब्धता के बीच के अंतर को कम करने के लिए व्यापक जन-जागरूकता की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं आई बैंक प्रभारी डॉ. नीलेश मोहन ने कॉर्निया दान एवं कॉर्निया प्रत्यारोपण की प्रक्रिया, उसके महत्व तथा नेत्रदान के माध्यम से दृष्टिहीन व्यक्तियों को नई रोशनी प्रदान करने की संभावनाओं पर विस्तार से जानकारी दी। यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. रोहित उपाध्याय ने भारत में अंग प्रत्यारोपण की वर्तमान स्थिति, उपलब्ध सुविधाओं तथा भविष्य की संभावनाओं पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि समय पर अंगदान की उपलब्धता अनेक गंभीर रोगियों का जीवन बचा सकती है। वहीं नेफ्रोलॉजी विभाग के डॉ. प्रेम शंकर पटेल ने किडनी दान एवं किडनी प्रत्यारोपण से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों पर प्रकाश डालते हुए जीवित एवं मृतक अंगदान की आवश्यकता और उपयोगिता को विस्तार से समझाया। मौके पर सोट्टो बिहार की आईईसी कंसल्टेंट एकता ने पावर पॉइंट प्रस्तुति के माध्यम से भारत में अंगों की मांग एवं उपलब्धता के बीच के अंतर को रेखांकित किया। उन्होंने अंगदान से जुड़े प्रचलित मिथकों एवं भ्रांतियों का वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर निराकरण किया तथा यह भी बताया कि 18 वर्ष या उससे अधिक आयु का कोई भी व्यक्ति अंगदान की शपथ लेकर इस जीवनदायी अभियान का हिस्सा बन सकता है। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों के लिए एक इंटरैक्टिव अंगदान क्विज़ एवं प्रश्नोत्तर सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें उपस्थित चिकित्सकों, मरीज़ों एव उनके अभिभावको ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। सभी वक्ताओं ने एक स्वर में समाज से अंगदान के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने, परिवार के साथ इस विषय पर चर्चा करने तथा अधिक से अधिक लोगों को अंगदान की शपथ लेने के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।


