छात्रों के आगे झुकी झारखंड सरकार, 14वीं जेपीएससी परीक्षा होगी रद्द-रिपोर्ट में दावा

Lok Bimb
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रांची : झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन 16वें दिन भी जारी है। सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच रविवार को तीसरे दौर की बातचीत हुई। राज्य अतिथि गृह में छह छात्र प्रतिनिधियों और सरकार के बीच करीब चार घंटे तक बातचीत चलती रही। इस बीच कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि दोनों पक्षों के बीच कई मांगों पर सहमति बन गई है। हालांकि, इन फैसलों की सरकार की ओर से अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, बातचीत के दौरान फिलहाल तीन परीक्षाओं को रद्द करने पर सहमति बनी है। इनमें जेपीएससी बैकलॉग 2023, जेपीएससी बैकलॉग 2025 और 14वीं प्रारंभिक परीक्षा शामिल हैं।
बताया जा रहा है कि सरकार ने छात्रों को आश्वासन दिया है कि टीडीपीएल एजेंसी द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं की जांच कराई जाएगी। इसके अलावा अपराध अनुसंधान विभाग की जांच 90 दिनों के भीतर पूरी करने की बात कही गई है। आर्थिक मामलों की जांच प्रवर्तन निदेशालय द्वारा किए जाने की भी बात सामने आई है।
हालांकि, इन सभी बिंदुओं पर सरकार की ओर से अभी तक कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है।
छात्रों और सरकार के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ भी छात्र प्रतिनिधियों की मुलाकात हुई है, लेकिन छात्र अपनी प्रमुख मांगों से पीछे हटने के लिए तैयार नहीं हैं।
यदि बातचीत के जरिए समाधान नहीं निकलता है तो आंदोलनकारी छात्रों ने 10 अगस्त को विधानसभा तक विशाल मार्च निकालने की घोषणा की है।
अखिल भारतीय छात्र संघ ने भी 10 अगस्त के मार्च में शामिल होने की बात कही है। संगठन ने कहा है कि उसके कार्यकर्ता अपने संगठन का झंडा लेकर मार्च में शामिल नहीं होंगे।
वहीं, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने 11 अगस्त को विधानसभा तक अलग मार्च निकालने की घोषणा की है।
छात्र आंदोलन के बीच कथित तौर पर दो गुटों के उभरने की बात भी सामने आई है। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे जेपीएससी-जेएसएससी सुधार मंच और डुमरी विधायक जयराम महतो, जिन्हें ‘टाइगर महतोÓ के नाम से भी जाना जाता है, से जुड़े एक अन्य गुट के बीच मतभेद बढऩे की खबर है।
रिपोर्टों के अनुसार, दोनों गुटों के बीच असहमति इतनी बढ़ गई है कि वे बातचीत के लिए एक साथ बैठने से भी इनकार कर रहे हैं। हालांकि, आंदोलन के दोनों पक्षों की ओर से इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है।
छात्रों के समर्थन में डुमरी के विधायक जयराम महतो भी पुराने विधानसभा परिसर में एक दिवसीय उपवास पर बैठे हैं। उन्होंने कहा कि विधायक होने के नाते उनका उपवास सरकार पर अतिरिक्त दबाव बनाने में मदद कर सकता है।
जयराम महतो ने कहा कि इस मामले की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच होनी चाहिए। उनका आरोप है कि सरकार को कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों की जानकारी है और यह कोई छोटा मामला नहीं है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी आंदोलनकारी छात्रों के समर्थन में सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के आंदोलन के दौरान राजधानी की सड़कों पर पुलिस ने लाठियां और पैलेट चलाए, लेकिन केंद्र सरकार की ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई।
राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों की मांगों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और जवाबदेही तय करनी होगी। उन्होंने आंदोलनकारी छात्रों के साथ मजबूती से खड़े रहने की बात कही।
आंदोलन कर रहे छात्र जेपीएससी, जेएसएससी-सीजीएल सहित अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की सीबीआई जांच, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।
छात्रों की प्रमुख मांगों में 14वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा को रद्द करना, जेपीएससी और जेएसएससी में संरचनात्मक सुधार करना तथा भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच कराना शामिल है।
छात्रों का कहना है कि जांच या तो सीबीआई से कराई जाए या झारखंड के बाहर के सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की स्वतंत्र समिति गठित कर पूरे मामले की जांच कराई जाए।
सरकार और छात्रों के बीच बातचीत के बाद कई मांगों पर सहमति बनने की खबरों के बीच अब सभी की नजर सरकार की आधिकारिक घोषणा पर है। यदि बातचीत से समाधान निकलता है तो 16 दिनों से जारी आंदोलन समाप्त होने की दिशा में आगे बढ़ सकता है। वहीं, सहमति नहीं बनने की स्थिति में 10 अगस्त को प्रस्तावित विधानसभा मार्च आंदोलन को नया रूप दे सकता है।

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