मैदान में उगी घास-झाड़ियां, टूटी छत और जर्जर गैलरी से खिलाड़ी परेशान,सरकारी पहल के बावजूद नहीं शुरू हुआ काम
अनिल कुमार
मोहनपुर : प्रखंड के एकमात्र प्रखंड स्तरीय स्टेडियम की बदहाली खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। स्टेडियम के जीर्णोद्धार के लिए करीब दो वर्ष पहले सरकारी स्तर पर पहल की गई थी और 47 लाख 66 हजार 400 रुपये का प्राक्कलन तैयार कर प्रशासनिक स्वीकृति एवं राशि आवंटन के लिए अनुशंसा भी भेजी गई थी। इसके बावजूद अब तक जीर्णोद्धार का काम शुरू नहीं हो सका है। ऐसे में खिलाड़ियों को बदहाल मैदान में ही खेलने को मजबूर होना पड़ रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिला खेल शाखा, देवघर कार्यालय की ओर से पत्रांक 265, दिनांक 21 सितंबर 2024 को स्टेडियम के जीर्णोद्धार से संबंधित विस्तृत प्रस्ताव भेजा गया था। यह प्रस्ताव झारखंड सरकार के मंत्री हफीजुल हसन के मोहनपुर क्षेत्र भ्रमण के दौरान दिए गए निर्देश के बाद तैयार किया गया था। जिला परिषद के जिला अभियंता की ओर से तकनीकी स्वीकृति प्राप्त प्राक्कलन तैयार किया गया, जिसमें कुल 47,66,400 रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया गया था।
पवेलियन से लेकर बाउंड्री वॉल तक होना था निर्माण
प्रस्ताव के तहत स्टेडियम की पवेलियन बिल्डिंग की मरम्मत, गैलरी और दुकानों का निर्माण अथवा सुधार, बाउंड्री वॉल की मरम्मत, मैदान का समतलीकरण एवं तैयारी, डीप बोरिंग तथा नाली निर्माण जैसे कार्य शामिल किए गए थे। इसके बाद उपायुक्त की ओर से प्रशासनिक स्वीकृति और राशि आवंटन के लिए पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद एवं युवाकार्य विभाग, रांची को अनुशंसा भेजी गई थी।
हालांकि, प्रस्ताव भेजे जाने के बाद भी स्टेडियम की स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं आया है। अब तक न तो जीर्णोद्धार का काम शुरू हुआ है और न ही मैदान को खिलाड़ियों के अनुकूल बनाने की दिशा में ठोस पहल नजर आ रही है। प्रस्ताव पर प्रशासनिक स्वीकृति और आवंटन की वर्तमान स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण योजना का भविष्य भी अधर में दिखाई दे रहा है।
मैदान में गड्ढे, पवेलियन की छत टूटी
मोहनपुर स्टेडियम की मौजूदा स्थिति खेल सुविधाओं की कमी को उजागर करती है। मैदान में जगह-जगह घास-झाड़ियां उगी हुई हैं और गड्ढों के कारण खिलाड़ियों को खेलने में परेशानी होती है। पवेलियन की छत टूटी हुई है, बाउंड्री वॉल कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त है और गैलरी भी जर्जर अवस्था में है। ऐसी स्थिति में खिलाड़ियों की सुरक्षा और बेहतर खेल अभ्यास को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
हाल ही में आयोजित पत्रकार बनाम पुलिस टीम क्रिकेट टूर्नामेंट के दौरान भी खिलाड़ियों को इसी बदहाल मैदान में खेलना पड़ा था। इस आयोजन के दौरान स्टेडियम की स्थिति एक बार फिर चर्चा में आई। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब प्रखंड स्तरीय स्टेडियम की हालत ऐसी है, तो ग्रामीण प्रतिभाओं को बेहतर खेल सुविधाएं कैसे मिलेंगी?
खिलाड़ियों और ग्रामीणों में नाराजगी
स्टेडियम के जीर्णोद्धार में हो रही देरी को लेकर स्थानीय खिलाड़ियों और ग्रामीणों में नाराजगी है।
उनका कहना है कि मोहनपुर जैसे बड़े प्रखंड में युवाओं को खेल अभ्यास के लिए बेहतर मैदान और आवश्यक सुविधाएं मिलनी चाहिए। स्टेडियम का विकास होने से क्रिकेट सहित अन्य खेलों को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा निखारने का अवसर मिल सकेगा।
स्थानीय लोगों ने संबंधित विभाग से प्रस्ताव की वर्तमान स्थिति स्पष्ट करने, प्रशासनिक स्वीकृति और आवंटन की प्रक्रिया में तेजी लाने तथा जल्द से जल्द जीर्णोद्धार कार्य शुरू कराने की मांग की है।
अब सवाल यह है कि 47 लाख 66 हजार 400 रुपये की लागत वाले इस प्रस्ताव पर कार्रवाई कब होगी?
क्या मोहनपुर स्टेडियम की बदहाली दूर होगी और खिलाड़ियों को बेहतर मैदान मिल पाएगा, या फिर जीर्णोद्धार की योजना कागजी प्रक्रिया तक ही सीमित रह जाएगी? क्षेत्र के खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों को अब संबंधित विभाग की पहल का इंतजार है।


