मालखान महतो
चांडिल / ईचागढ़ : विगत दो दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश और चांडिल डैम का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंचने से ईचागढ़ और चांडिल समेत पूरे सरायकेला-खरसावां जिले में जनजीवन और कृषि व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। बुधवार से शुरू हुई झमाझम बारिश गुरुवार को भी दिनभर जारी रही, जिससे एक तरफ जहां आम जनजीवन अस्त-व्यस्त रहा, वहीं दूसरी तरफ चांडिल डैम का जलस्तर शाम लगभग 4:00 बजे बढ़कर 181 RL (मीटर) तक पहुंच जाने से स्थिति बेहद भयावह हो गई है।
डैम का जलस्तर अचानक बढ़ने के कारण प्रभावित क्षेत्र के दर्जनों गांवों के खेतों में कमर भर पानी घुस गया है, जिससे किसानों की महीनों की कड़ी मेहनत से तैयार धान सहित अन्य फसलें पूरी तरह डूबकर बर्बाद होने के कगार पर आ गई हैं। जलभराव की मार झेल रहे इन प्रभावित गांवों में कुकड़ू प्रखंड के बांदाबीर, केंदाआन्दा, आदारडीह, चौका, कारकीडीह और चानो चोराटखाल; नीमडीह प्रखंड के हुटू, आंडा, तिलाईटांड़, कल्याणपुर, लावा और सीमा; चांडिल प्रखंड के रसुनिया, हाथीनादा, रूयानी, पियालडीह, बोराबिंदा, केशरगड़िया और डिमुडीह; तथा ईचागढ़ प्रखंड के दियाडीह, रुगड़ी, खोकरो, मैसाढ़ा, गाराडीह, मातकमडीह, लोपसोडीह, छोटा आमड़ा, हुटुप, ईचागढ़, पातकुम और हूरलूंग जैसे तमाम गांव शामिल हैं, जहां किसानों के अरमान पानी में डूब गए हैं।
लगातार हो रही इस बारिश और जलप्रलय जैसी स्थिति पर विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन के अध्यक्ष राकेश रंजन महतो ने गहरी चिंता और आक्रोश व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि जिन विस्थापितों ने देश और क्षेत्र के विकास के लिए अपनी उपजाऊ जमीन और जीवन का बड़ा हिस्सा कुर्बान कर दिया, आज उन्हीं के खेतों में पानी घुसकर उनकी आजीविका पर संकट खड़ा कर दिया गया है। श्री महतो ने कड़े शब्दों में आरोप लगाया कि संकट की इस घड़ी में जब किसान जलस्तर बढ़ने की समस्या को लेकर संबंधित अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास करते हैं, तो मुख्य अभियंता और कार्यपालक अभियंता से संपर्क ही नहीं हो पाता। ऐसे में सवाल यह उठता है कि आपात स्थिति में इन बेबस किसानों की फरियाद कौन सुनेगा?
एक तरफ जहां मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार 24 सितंबर को पूरे जिले में औसतन 62.7 मिमी बारिश दर्ज की गई (जिसमें कुकड़ू में सबसे अधिक 98.6 मिमी, नीमडीह में 97.4 मिमी, ईचागढ़ में 74.4 मिमी, गम्हरिया में 65.2 मिमी, कुचाई में 53.2 मिमी, खरसावां में 50.6 मिमी, सरायकेला में 32 मिमी, तथा राजनगर और चांडिल में 29.8 मिमी वर्षापात शामिल है), वहीं इस भारी बारिश और जलजमाव ने शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों को प्रभावित किया है। एक तरफ जहां समय पर नालियों की साफ-सफाई न होने से सड़कों पर गंदा पानी बह रहा है और बाजारों में चहल-पहल कम है, तो दूसरी तरफ चांडिल डैम के बढ़ते पानी ने विस्थापितों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट पैदा कर दिया है। विस्थापित मंच ने दो टूक चेतावनी दी है कि विकास के नाम पर किसानों और विस्थापितों के अधिकारों की यह अनदेखी अब कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


