नई दिल्ली : भारत और क्रिप्टो परिसंपत्तियों का रिश्ता कभी सरल नहीं रहा है, लेकिन संसद में चल रही हालिया चर्चा यह दिखाती है कि अब यह विषय पहले से ज्यादा समझदारी के साथ उठाया जा रहा है। 2025 से लेकर 2026 की शुरुआत तक के सत्रों में यह बदलाव साफ नजर आता है। अब सवाल केवल यह नहीं है कि वर्चुअल डिजिटल एसेट क्या है, बल्कि यह है कि पैसा कहाँ जा रहा है, इसमें कितनी पारदर्शिता है, और इसकी तकनीक आम लोगों के लिए कैसे काम आ सकती है। इससे यह संकेत मिलता है कि नीति अब ज्यादा व्यवस्थित और सख्त दिशा में बढ़ रही है, हालांकि यह देखना जरूरी होगा कि इस सख्ती के बीच नए प्रयोग और भागीदारी के लिए जगह बनी रहती है या नहीं। संसदीय चर्चाओं से सामने आए आंकड़ों में क्रिप्टो लेनदेन पर एकत्रित टीडीएस का राज्यवार डेटा खास ध्यान खींचता है। देशभर में यह संग्रह 2022-23 में लगभग 221 करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में 511 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया, जो इस क्षेत्र में बढ़ती गतिविधि को दिखाता है। इस कुल राशि में महाराष्ट्र की हिस्सेदारी 293.40 करोड़ रुपये रही, जिससे यह साफ होता है कि क्रिप्टो से जुड़ी गतिविधियाँ कुछ राज्यों में ज्यादा केंद्रित हैं। कर्नाटक में भी तेजी से बढ़ोतरी हुई है, जहां यह आंकड़ा करीब 39 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 134 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। हालिया संसदीय चर्चा यह दिखाती है कि सरकार अब इस क्षेत्र को लेकर ज्यादा स्पष्ट और सक्रिय हो गई है। ध्यान अब पैसे के प्रवाह पर नजर रखने, गलत गतिविधियों को रोकने और तकनीक के सही उपयोग पर है। अब सबसे अहम सवाल यह है कि क्या यह संतुलन भविष्य में इस क्षेत्र को आगे बढ़ने का मौका देगा, या ज्यादा सख्ती इसकी रफ्तार को धीमा कर देगी।
भारत में क्रिप्टो विमर्श का बदलता स्वरूप: 2025 से अब तक संसद में उठे सवालों और नीति चर्चाओं की एक झलक

Sign Up For Daily Newsletter
Be keep up! Get the latest breaking news delivered straight to your inbox.
By signing up, you agree to our Terms of Use and acknowledge the data practices in our Privacy Policy. You may unsubscribe at any time.
Leave a Comment Leave a Comment
Stay Connected
- Advertisement -

