जमशेदपुर : आदिवासी कुड़मि समाज के मूलखूॅंटी मूलमानता (संरक्षक) अजीत प्रसाद महतो के नेतृत्व में कुड़मि समाज के प्रतिनिधिमंडल ने अपनी जातीय पहचान, पारंपरिक धर्म एवं कुड़मालि भाषा को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता देने की मांग को लेकर 6 अगस्त 2026 को भारत सरकार, नई दिल्ली में रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त के समक्ष मांग-पत्र सौंपा।
प्रतिनिधिमंडल में जमशेदपुर सांसद विद्युत वरण महतो, गिरिडीह सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी, पुरुलिया सांसद ज्योतिर्मय सिंह महतो, आदिवासी कुड़मि समाज के अध्यक्ष शशांक शेखर महतो सहित समाज के अनेक प्रतिनिधि मंडल उपस्थित रहे।
मांग पत्र में आगामी जनगणना में कुड़मि समाज की जातीय पहचान एवं मातृभाषा का स्पष्ट एवं पृथक अंकन, पारंपरिक “प्रकृति धर्म अर्थात सारना कुड़मि धर्म” की मान्यता तथा कुड़मालि भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की दिशा में आवश्यक पहल करने की मांग की गई।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि कुड़मि समाज की मांग केवल पहचान का प्रश्न नहीं, बल्कि उसकी भाषा, संस्कृति, धार्मिक परंपरा और ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण से जुड़ा विषय है। समाज ने केंद्र सरकार से इन मांगों पर संवेदनशीलता पूर्वक विचार करते हुए शीघ्र सकारात्मक पहल की अपेक्षा व्यक्ति की।
प्राप्त जानकारी के अनुसार 7 अगस्त को गृह मंत्रालय की ओर से आश्वासन दिया गया कि वर्तमान संसद सत्र की व्यस्तताओं के कारण गृह मंत्री अमित शाह शीघ्र ही आदिवासी कुड़मि समाज के मुलखूॅंटी मूलमानता (संरक्षक) अजीत प्रसाद महतो तथा सांसद विद्युत वरण महतो, चंद्र प्रकाश चौधरी, ज्योतिर्मय सिंह महतो एवं खीरू महतो सहित अन्य प्रतिनिधियों के साथ बैठक करेंगे। इस बैठक में कुड़मि समाज की मांगों पर विचार कर आवश्यक निर्णय लिए जाने की बात कही गई है। इस बैठक में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री भी शामिल होने की संभावना व्यक्त की है।
इस आश्वासन से कुड़मि समाज में अपनी भाषा, धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक अधिकारों को लेकर सकारात्मक उम्मीद जगी है।
इस अवसर पर कृष्ण पद महतो, प्रेमचॉंद महतो, कमलेश महतो, अनंत महतो, वनमाली महतो एवं राधानाथ महतो सहित अनेक सामाजिक प्रतिनिधि उपस्थित थे।
कुड़मि समाज की पहचान, धर्म एवं कुड़मालि भाषा की राष्ट्रीय मान्यता की मांग

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