भगवान को जातियों में बांटने के बजाय उनके आदर्शों को आत्मसात करने की अपील
गोपाल विद्यार्थी
बिहटा : स्थानीय अमहारा स्थित डॉ. अशोक गगन कॉलेज परिसर में परशुराम धाम के तत्वावधान में भगवान श्री परशुराम जयंती धूमधाम से मनाई गयी। जयंती पर उनके आदमकद प्रतिमा के समीप वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ 24 घंटे का अखंड कीर्तन व भव्य भंडारा का आयोजन किया।मौके पर आयोजित जयंती समारोह को संबोधित करते हुए चाणक्या ग्रुप ऑफ इंस्टिचियूशन के डॉ अशोक गगन ने कहा कि भगवान परशुराम सहित किसी भी देवता या महापुरुष को जातियों में बांटने से उनका कद छोटा होता है और समाज में द्वेष फैलता है।उन्होंने जोर देकर कहा कि परशुराम वंशियों को समाज के हर तबके के लोगों की भलाई की कामना करनी चाहिए। ऐसा करने पर ही उन्हें सभी वर्गों से सम्मान प्राप्त होगा। यदि कोई परशुराम वंशी स्वामी सहजानंद सरस्वती, गुरु चाणक्य या राष्ट्रकवि दिनकर जैसे सम्माननीय और प्रभावशाली बनना चाहता है, तो उन्हें इन महापुरुषों द्वारा अपनाए गए आदर्शों को आत्मसात करना होगा और उनके दिखाए मार्ग पर चलना होगा।उन्होंने परशुराम के वंशजों से अपील करते हुए कहा कि वे अनावश्यक रूप से किसी भी मामले में हस्तक्षेप करने से बचें और हवा में उड़ती बातों को अपने ऊपर न लें।पूर्व विधायक रामजन्म शर्मा ने ब्राह्मण समाज की राजनीतिक उपेक्षा पर चिंता जताते हुए एकजुट होने का आह्वान किया।
उंन्होने कहा कि भगवान को जातियों में न बांटकर, उनके उच्च आदर्शों को आत्मसात करना चाहिए।एनआईटी जमशेदपुर के डीन डॉ शैलेन्द्र कुमार ने भगवान परशुराम ने अन्याय, अत्याचार और शोषण के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी, और आज की सामाजिक परिस्थितियों में भी उनके आदर्शों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है।भगवान परशुराम ज्ञान (शास्त्र) और शौर्य (शस्त्र) के अद्भुत संगम हैं, जो युवाओं को अनुशासित और समाज के प्रति जिम्मेदार बनने की प्रेरणा देते हैं।वही आईआईटी सहायक रजिस्ट्रार त्रिपुरारी शरण ने भगवान परशुराम को केवल एक समाज का नहीं, बल्कि पूरे समाज का पूजनीय बताया। उन्होंने ब्राह्मणों और अन्य वर्गों से आह्वान किया कि वे भगवान परशुराम के न्याय, साहस और त्याग के आदर्शों को अपनाएं। मौके पर आईआईटी सुरक्षा अधिकारी दीपक चौरसिया,सुनील कुमार, विजय कुमार सिंह, अशोक सिंह, सतेंद्र सिंह आदि मौजूद थे।


