सरायकेला/चांडिल : चांडिल डैम विस्थापित समन्वय मंच के बैनर तले बुधवार को चांडिल स्थित द गोल्डन रिसोर्ट (आईबी परिसर) में मंच की द्वितीय बैठक आयोजित की गई। बैठक का आयोजन “एक परियोजना – एक मंच – एक आवाज – सामूहिक नेतृत्व” के मूल उद्देश्य के साथ किया गया। बैठक में चांडिल डैम परियोजना से प्रभावित विस्थापितों की 44 वर्षों से लंबित पुनर्वास, मुआवजा, भूमि अधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार एवं आधारभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए व्यापक रणनीति तैयार की गई।
बैठक तीन सत्रों में संपन्न हुई। प्रथम सत्र में सभी प्रतिभागियों एवं विभिन्न संगठनों से आए प्रतिनिधियों का परिचय कराया गया तथा चांडिल डैम विस्थापन आंदोलन की वर्तमान स्थिति पर चर्चा हुई। द्वितीय एवं तृतीय सत्र में मंच के प्रस्तावित संविधान, संगठनात्मक ढांचे, आंदोलन की भावी रूपरेखा तथा समन्वय व्यवस्था पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
बैठक में सर्वसम्मति से कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। निर्णय लिया गया कि 7 अगस्त 2026 को राँची छात्र आंदोलन को चांडिल डैम विस्थापित समन्वय मंच अपना पूर्ण समर्थन देगा। इसी दिन मंच का प्रतिनिधिमंडल जल संसाधन विभाग के सचिव एवं जल संसाधन मंत्री हफीजुल हसन से मिलकर विस्थापितों की लंबित मांगों से संबंधित मांग-पत्र सौंपेगा तथा समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग करेगा।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि 16 अगस्त 2026 को मंच की तृतीय बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें आगामी चरण के आंदोलन की विस्तृत कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया जाएगा।
इसके साथ ही सर्वसम्मति से 25, 26 एवं 27 अगस्त 2026 को तीन दिवसीय “ग्रामीण संवाद सह जागरूकता यात्रा” निकालने का निर्णय लिया गया। यह यात्रा ईचागढ़ प्रखंड से प्रारंभ होगी और चरणबद्ध तरीके से चांडिल डैम परियोजना से प्रभावित गांवों तक पहुंचेगी। यात्रा के दौरान विस्थापित परिवारों से संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं का दस्तावेजीकरण किया जाएगा तथा उन्हें उनके संवैधानिक एवं पुनर्वास संबंधी अधिकारों के प्रति जागरूक किया जाएगा।
बैठक में उपस्थित प्रतिनिधियों ने कहा कि चांडिल डैम परियोजना से प्रभावित सभी परिवारों की समस्याएं समान हैं। इसलिए अब समय आ गया है कि सभी संगठन, गांव, जाति, राजनीतिक विचारधारा और सामाजिक समूह एक साझा मंच पर आकर संघर्ष को नई दिशा दें। वक्ताओं ने कहा कि जब तक विस्थापितों को सम्मानजनक पुनर्वास, भूमि का वैधानिक अधिकार, रोजगार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधा और मूलभूत नागरिक सुविधाएं सुनिश्चित नहीं हो जातीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
इस अवसर पर विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन, विस्थापित मुक्ति वाहिनी, विस्थापित संघर्ष समिति, संयुक्त ग्राम सभा सहित विभिन्न संगठनों एवं आंदोलनकारी साथियों ने मंच की एकजुटता का समर्थन किया तथा इसे चांडिल डैम विस्थापित आंदोलन के लिए एक ऐतिहासिक पहल बताया।
बैठक में सर्वसम्मति से मंच की संयोजक मंडली का गठन किया गया। इसमें राकेश रंजन महतो, नारायण गोप, अंबिका जादव, श्यामल मार्डी, मनोहर महतो, मंजू गोराई, विवेक सिंह बाबू, विष्णु महापात्र, अनूप कुमार महतो, अवधेश मुर्मू तथा कृष्णा कालिंदी को शामिल किया गया।
बैठक में सरोज कुमार, सहदेव, गुरुचरण टुडू, सुरजीत कुमार यादव, मोहम्मद मकसूद आलम, हरे कृष्णा महतो, वीर सिंह सोरेन, चित्त दास, राजीव महतो, सागर महतो, डमन बास्के, रंजीत कुमार महतो, गाजूराम माझी सहित विभिन्न गांवों से आए विस्थापित प्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता एवं आंदोलनकारी उपस्थित रहे।
बैठक के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने एक स्वर में संकल्प लिया कि “एक परियोजना – एक मंच – एक आवाज – सामूहिक नेतृत्व” के सिद्धांत पर आगे बढ़ते हुए चांडिल डैम विस्थापितों के न्यायपूर्ण एवं सम्मानजनक पुनर्वास तक संघर्ष को संगठित, शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से निरंतर जारी रखा जाएगा।


