फातेह आलम तालझारी
प्रधानाचार्य ने ठेकेदार पर मनमानी का लगाया आरोप, बीईईओ से जांच व कार्रवाई की मांग
तालझारी : प्रखंड मुख्यालय स्थित राजकीय बुनियादी मध्य विद्यालय तालझारी में अनुसूचित जनजाति के स्कूली बच्चों के लिए कल्याण विभाग की ओर से छात्रावास भवन का निर्माण कराया जाना है। छात्रावास निर्माण के लिए विद्यालय परिसर में स्थित जर्जर भवन को ध्वस्त करने की जिला शिक्षा विभाग से अनुमति ली गई है। आरोप है कि भवन तोड़ने के दौरान ठेकेदार द्वारा निर्धारित जर्जर भवन के अलावा सुरक्षित भवन के हिस्सों को भी तोड़ा जा रहा है। इसको लेकर विद्यालय के प्रधानाचार्य राजेश कुमार यादव एवं प्रबंधन समिति ने आपत्ति जताई है।
प्रधानाचार्य ने बताया कि जर्जर भवन को हटाने की अनुमति दी गई थी, लेकिन ठेकेदार द्वारा जर्जर भवन के साथ-साथ ऐसे भवन को भी तोड़ा जा रहा है, जो अभी सुरक्षित है। यदि इसी तरह भवनों को तोड़ा गया तो आने वाले दिनों में विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों के लिए कक्षाओं की कमी हो सकती है और पठन-पाठन प्रभावित होने की आशंका है। प्रधानाचार्य ने यह भी आरोप लगाया कि ध्वस्त किए जा रहे भवन से निकलने वाले छड़ और अन्य लोहे के सामान को विद्यालय प्रबंधन अथवा संबंधित विभाग को सूचना दिए बिना ठेकेदार द्वारा काम करा रहे जेसीबी ड्राइवर एवं स्टाफ के द्वारा उठाकर ले जाया जा रहा है। उन्होंने इस पर भी आपत्ति जताते हुए विद्यालय की संपत्ति एवं सामग्री का उचित हिसाब रखने की मांग की है।
विद्यालय परिसर में स्थित एक पुराने कुएं को भी तोड़े गए भवन की ईंटों से बंद कर दिया गया है। प्रधानाचार्य के अनुसार उन्होंने ठेकेदार को ऐसा करने से मना किया, लेकिन इसके बावजूद काम जारी रखने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि विद्यालय परिसर में मौजूद इस तरह की संरचनाओं को बिना विभागीय अनुमति के हटाना उचित नहीं है। प्रधानाचार्य राजेश कुमार यादव ने पूरे मामले की जानकारी प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी रोबिन मंडल को दे दी है। उन्होंने बताया कि जई के दिशा-निर्देश के द्वारा कार्य कराया जा रहा है। बीईईओ की ओर से मामले की जांच कराने और जांच के बाद उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है। विद्यालय प्रबंधन ने मांग की है कि भवन ध्वस्तीकरण के कार्य की विभागीय स्तर पर जांच कराई जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि केवल स्वीकृत जर्जर भवन को ही हटाया जाए। साथ ही ध्वस्त भवन से निकलने वाली सामग्री का भी नियमानुसार निस्तारण अथवा अभिलेख तैयार किया जाए, ताकि विद्यालय की संपत्ति को लेकर किसी तरह की अनियमितता न हो।


