फातेह आलम तालझारी
सिद्धो-कान्हू सभागार में भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम, उत्कृष्ट प्रस्तुतियों के लिए विद्यालय हुए सम्मानित
साहिबगंज : विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर रविवार को साहिबगंज स्थित सिद्धो-कान्हू सभागार में झारखंड आदिवासी महोत्सव-2026 के तहत भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य जिले की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, परंपरा, कला, जीवन-दर्शन और प्रकृति संरक्षण के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ उपायुक्त दीपक कुमार दुबे, वन प्रमंडल पदाधिकारी प्रबल गर्ग एवं नगर परिषद अध्यक्ष रामनाथ पासवान ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस दौरान सभागार पारंपरिक गीत-संगीत और नृत्य की आकर्षक प्रस्तुतियों से गूंज उठा। जनजातीय संस्कृति और प्रकृति संरक्षण के प्रति संकल्प जरूरी :उपायुक्त
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपायुक्त दीपक कुमार दुबे ने विश्व आदिवासी दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि 9 अगस्त का दिन विश्वभर के आदिवासी समुदायों की विशिष्ट पहचान, संस्कृति, परंपरा और अधिकारों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए संकल्प लेने का अवसर है।
उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज का जल, जंगल और जमीन से सदियों पुराना आत्मीय संबंध रहा है। प्रकृति संरक्षण के प्रति आदिवासी समाज की प्रतिबद्धता पूरे समाज के लिए प्रेरणादायक है। सरहुल जैसे प्रकृति पर्व इसके जीवंत उदाहरण हैं। उन्होंने सभी से जल, जंगल और जमीन के संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया। उपायुक्त ने कहा कि सोहराय चित्रकला, डोकरा कला, बांस एवं पारंपरिक शिल्प, लोकचित्रकला तथा जनजातीय नृत्य-संगीत झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक हैं। इन परंपराओं को संरक्षित करने के साथ नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज के सामाजिक, शैक्षणिक एवं आर्थिक विकास के लिए सरकार की ओर से कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। पीएम-जनमन, डाकिया योजना, जाहेरथान उन्नयन, धुमकुड़िया भवन निर्माण, छात्रवृत्ति योजनाएं, जयपाल सिंह मुंडा छात्रवृत्ति योजना एवं छात्रावास निर्माण जैसी योजनाओं का लाभ पात्र लाभुकों तक पहुंचाना जिला प्रशासन की प्राथमिकता है। उपायुक्त ने जनजातीय वीरों को नमन करते हुए कहा कि सिद्धो-कान्हू, चांद-भैरव, बाबा तिलका मांझी, भगवान बिरसा मुंडा, तेलंगा खड़िया, नीलांबर-पीतांबर और जयपाल सिंह मुंडा जैसे महान विभूतियों का संघर्ष और बलिदान सदैव प्रेरणा देता रहेगा।
प्रकृति और जनजातीय संस्कृति का संरक्षण सभी की जिम्मेदारी डीएफओ
वन प्रमंडल पदाधिकारी प्रबल गर्ग ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस केवल एक दिवस नहीं, बल्कि आदिवासी समुदायों की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक ज्ञान, अधिकारों और प्रकृति के साथ उनके सह-अस्तित्व को सम्मान देने का अवसर है। उन्होंने कहा कि झारखंड की पहचान संथाल, मुंडा, पहाड़िया सहित विभिन्न जनजातीय समुदायों की गौरवशाली परंपराओं से जुड़ी है। जनजातीय समाज ने सदियों से जंगल, वन्यजीव, नदियों, पहाड़ों और जैव विविधता के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि प्रकृति केवल उपयोग की वस्तु नहीं, बल्कि जीवन का आधार और साझा विरासत है। इसे सुरक्षित रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
पारंपरिक नृत्य और लघु नाटिका ने मोहा मन
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विद्यालयों एवं कला दलों ने पारंपरिक नृत्य, गीत-संगीत और लघु नाटिका के माध्यम से आदिवासी संस्कृति की आकर्षक झलक प्रस्तुत की। जिला जनसंपर्क कार्यालय से संबद्ध कला दल ने छऊ नृत्य, स्वागत नृत्य एवं पारंपरिक नृत्य की प्रस्तुति दी। इसके अलावा मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय, केजीबीवी, पीएम श्री उत्कृष्ट उच्च विद्यालय बड़ा पचगढ़, पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय, मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय कन्या साहिबगंज, पीएम श्री उच्च विद्यालय नगरपालिका, संत टेरेसा विद्यालय, आद्या डांस एकेडमी, यमुनादास चौधरी कन्या उच्च विद्यालय, मध्य विद्यालय तालाब एवं संत जेवियर अंग्रेजी विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए।
कला दल की लघु नाटिका के माध्यम से आदिवासी समाज की परंपराओं, प्रकृति के प्रति सम्मान और सामुदायिक जीवन-मूल्यों को प्रभावी ढंग से प्रदर्शित किया गया।
उत्कृष्ट प्रस्तुति के लिए विद्यालय सम्मानित
सांस्कृतिक प्रतियोगिता में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, बोरियो ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय को द्वितीय तथा कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, तालझारी को तृतीय पुरस्कार प्रदान किया गया।
वहीं मध्य विद्यालय तलबन्ना एवं उत्कृष्ट उच्च विद्यालय, पंचगढ़ को सांत्वना पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
बड़ी संख्या में अधिकारी, जनप्रतिनिधि और आमजन रहे मौजूद कार्यक्रम में परियोजना निदेशक आईटीडीए संजय कुमार दास, जिला योजना पदाधिकारी अनुप कुमार, डीपीएम जेएसएलपीएस मार्टिन तारीख, अंचल अधिकारी साहिबगंज बासुकीनाथ टुडू, डीपीएम यूआईडीएआई संदीप कुमार सहित विभिन्न विभागों के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, कलाकार, जनजातीय समुदायों के प्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे। भव्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों को झारखंड की समृद्ध जनजातीय विरासत से रूबरू कराया। कार्यक्रम के माध्यम से संस्कृति संरक्षण, प्रकृति संरक्षण और जनजातीय अधिकारों के प्रति जागरूकता का मजबूत संदेश दिया गया।


