मालखान महतो
ईचागढ़, सरायकेला-खरसावां: विकास के तमाम दावों की पोल खोलती एक तस्वीर ईचागढ़ प्रखंड से आई है। पाटपुर केनाल मुख्य सड़क से चीतरी गांव को जोड़ने वाला करीब डेढ़ किलोमीटर का रास्ता, रास्ता नहीं बल्कि जी का जंजाल बन गया है। तस्वीर में साफ दिख रहा है कि पूरी सड़क घुटने भर कीचड़ और पानी में तब्दील हो चुकी है, जहां गाड़ी तो दूर, पैदल चलना भी सजा बन गया है।
बारिश के बाद से हालात और बदतर हो गए हैं। ग्रामीणों को कई जगह कीचड़ से बचने के लिए साइकिल को कंधे पर उठाकर पार करना पड़ रहा है।
सबसे ज्यादा मार स्कूली बच्चों और मरीजों पर
इस बदहाल सड़क की सबसे बड़ी कीमत चुका रहे हैं ईचागढ़ प्लस टू उच्च विद्यालय के विद्यार्थी। रोजाना सैकड़ों बच्चे इसी दलदल से होकर स्कूल जाने को मजबूर हैं। जूते-चप्पल हाथ में लेकर, कपड़े गंदे कर किसी तरह स्कूल पहुंचना उनकी मजबूरी है।
इससे भी दर्दनाक स्थिति मरीजों और गर्भवती महिलाओं की है। गांव तक एंबुलेंस या कोई भी वाहन नहीं पहुंच पा रहा। बीमार पड़ने पर लोगों को चारपाई पर लादकर मुख्य सड़क तक लाना पड़ता है, तब जाकर अस्पताल ले जाया जा सकता है। जरा सोचिए, इमरजेंसी में इस 1.5 KM को पार करने में कितनी जान जोखिम में पड़ती होगी।
4 साल पहले ग्रामीणों ने खुद बनाई थी सड़क, सरकार ने नहीं ली सुध
उप मुखिया संतोष कुमार सिंह ने बताया कि चीतरी गांव जाने के लिए पहले कोई रास्ता ही नहीं था। करीब 4 साल पहले गांव के ही रैयतों ने अपनी निजी जमीन दान दी और पूरे गांव ने श्रमदान करके इस कच्चे रास्ते को बनाया था ताकि गांव जुड़ सके। सड़क को पक्का कराने के लिए सांसद संजय सेठ के साथ ग्रामीणों का प्रतिनिधिमंडल सड़क निर्माण विभाग के सचिव से मिलकर ज्ञापन भी सौंप चुका है, लेकिन 4 साल बाद भी फाइल धूल फांक रही है।
ग्रामीणों की चेतावनी – अब धरना-प्रदर्शन होगा
लगातार अनदेखी से गुस्साए ग्रामीणों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। उप मुखिया ने साफ कहा है कि अगर जल्द ही सड़क निर्माण शुरू नहीं हुआ तो पूरे गांव के साथ प्रखंड मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और सड़क निर्माण विभाग से मांग की है कि जल्द से जल्द इस सड़क का निर्माण कराकर उन्हें इस नारकीय स्थिति से छुटकारा दिलाया जाए।


