केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से रांची स्थित ICAR-IIAB की विभिन्न नई सुविधाओं का किया उद्घाटन

Lok Bimb
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श्री चौहान ने वैज्ञानिकों के “लैब से लैंड” तक प्रौद्योगिकियों को पहुंचाने के प्रयासों की सराहना की

श्री चौहान ने झारखंड में वैज्ञानिक कृषि, उन्नत बीज, एकीकृत कृषि, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन और स्थान-विशिष्ट कृषि प्रौद्योगिकियों के महत्व पर दिया जोर

ICAR-IIAB ने 1,500 किसानों के लिए प्री-रबी किसान गोष्ठी का किया आयोजन

रांची : आईसीएआर–भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान (ICAR-IIAB), गढ़खटंगा, रांची द्वारा अनुसूचित जाति उप-योजना (SCSP) एवं जनजातीय उप-योजना (TSP) के अंतर्गत 08 अक्टूबर 2026 को प्री-रबी किसान गोष्ठी-सह-कृषि इनपुट वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में रांची, खूंटी, गुमला एवं रामगढ़ जिलों से लगभग 1,500 किसानों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों, वैज्ञानिकों एवं नीति-निर्माताओं के बीच प्रत्यक्ष संवाद स्थापित करना तथा वैज्ञानिक एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित करना था।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ICAR-IIAB की विभिन्न नई सुविधाओं का उद्घाटन किया। इनमें एडमिन-कम-स्कूल भवन, बिरसा मुंडा बहुउद्देशीय सभागार, जयपाल सिंह मुंडा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स तथा NEXTGEN Breeding Facility शामिल हैं। इसके साथ ही ICAR-IIAB में नए गेस्ट हाउस की आधारशिला भी रखी गई, जिसकी लागत 119 करोड़ रुपये है।

कार्यक्रम में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने झारखंड की समृद्ध प्राकृतिक एवं पारंपरिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां की जनजातीय परंपराओं में जल, पौधों एवं प्रकृति के अन्य तत्वों के संरक्षण और महत्व की गहरी समझ विद्यमान है। उन्होंने ICAR-IIAB को अनुसंधान, नवाचार एवं आत्मनिर्भरता के संगम के रूप में रेखांकित किया।

श्री चौहान ने कहा कि वर्तमान कृषि चुनौतियों से निपटने के लिए पारंपरिक ज्ञान के साथ-साथ वैज्ञानिक एवं प्रौद्योगिकी आधारित कृषि को अपनाना आवश्यक है। उन्होंने झारखंड की स्थानीय परिस्थितियों एवं उपलब्ध संसाधनों के अनुरूप उपयुक्त फसलों एवं किस्मों के चयन, किसानों को उन्नत बीजों की उपलब्धता तथा कृषि अनुसंधान संस्थानों द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियों को खेतों तक पहुंचाने पर जोर दिया।

केंद्रीय कृषि मंत्री ने सब्जियों, अनाज एवं पशुधन को शामिल करते हुए एकीकृत कृषि प्रणाली, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन तथा उर्वरकों के उचित उपयोग के बारे में किसानों को जागरूक करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने नकली बीज, मिलावटी उर्वरक एवं घटिया कीटनाशकों की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने किसान कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्रत्येक गांव तक पहुंचाने तथा आगामी रबी मौसम के लिए किसानों को वैज्ञानिक जानकारी एवं प्रशिक्षण उपलब्ध कराने का आह्वान किया। उन्होंने वैज्ञानिकों द्वारा “लैब टू लैंड” की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए आगामी दिनों में देशव्यापी “खेत बचाओ अभियान” शुरू करने का भी आह्वान किया।

इस अवसर पर भागीरथ चौधरी, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री ने अपने संबोधन में देश की खाद्य सुरक्षा एवं विकास में किसानों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने आधुनिक कृषि प्रौद्योगिकियों को अपनाने, मूल्य संवर्धन, किसान उत्पादक संगठनों एवं कृषि विज्ञान केंद्रों को अधिक प्रभावी बनाने, मृदा परीक्षण तथा संतुलित उर्वरक उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने किसानों को अपनी कृषि भूमि के एक हिस्से में प्राकृतिक खेती का प्रयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया तथा नकली बीज, मिलावटी उर्वरक एवं घटिया कीटनाशकों से किसानों को सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने किसान कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा कृषि प्रौद्योगिकियों को “लैब टू लैंड” के माध्यम से किसानों तक पहुंचाने के प्रयासों को और मजबूत करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. एम. एल. जाट, सचिव, DARE एवं महानिदेशक, ICAR ने पूर्वी भारत में कृषि क्षेत्र में नई क्रांति की संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए झारखंड में कृषि अनुसंधान एवं ज्ञान संस्थानों को और मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने राइस-फैलो इंटेंसिफिकेशन (Rice-Fallow Intensification) को व्यापक स्तर पर अपनाने, स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप उपयुक्त फसलों एवं किस्मों के चयन, पशुधन उत्पादकता बढ़ाने तथा अम्लीय मिट्टी एवं फास्फोरस की कमी जैसी कृषि संबंधी चुनौतियों के समाधान के लिए अनुसंधान को बढ़ावा देने का आह्वान किया। उन्होंने आगामी रबी मौसम के लिए उचित

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